जिला एवं सत्र न्यायालय माती स्थित विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी एक्ट कोर्ट में चल रहे हत्या के मामले की सुनवाई के दौरान गुरुवार को दोषसिद्व होने पर सात आरोपियों को आजीवन कारावास व 23-23 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई गई। कोर्ट ने कहा कि जुर्माना न अदा करने पर अभियुक्तों को 45 दिनों का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी एक्ट कोर्ट के अभियोजन अधिकारी रमेश चंद्र ने बताया कि रसूलाबाद थाना क्षेत्र के कारेरामपुर गांव निवासी लाखन पुत्र सोने लाल बेरिया ने 26 सितंबर 2003 को रसूलाबाद थाने में रिपोर्ट दर्ज कराते हुए बताया कि गांव के लालू प्रसाद पुत्र बेचे लाल, छुक्कनू पुत्र बेचेलाल, छोटे लाल पुत्र बेचेंलाल, सुभाष पुत्र देवी प्रसाद कहार, राज कुमार पुत्र सुमेर कहार, शिव कुमार पुत्र सुमेर कहार व मुन्ना लाल पुत्र रामेश्वर लाठी-डंडा व कुल्हाड़ी लेकर उसके घर में घुस आए। गाली गालौज कर जान से मारने की धमकी देने लगे। बचाव के लिए अरुण घर की दीवार फांदकर भागने का प्रयास करने लगा। उक्त आरोपियों ने पकड़कर उसके भाई अरुण की कुल्हाड़ी व लाठी डंडों से दिन दहाड़े हत्या कर दी। बचाव के लिए दौड़ी उसकी पत्नी को भी पीटकर घायल कर दिया। इसके बाद धमकी देेते हुए भाग गए।
गुरुवार को मामले की सुनवाई करते हुए विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी एक्ट विजेंद्र सिंह ने आरोपियाें को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही 23-23 हजार रुपये का जुर्माना ठोंका है। जुर्माना न अदा करने पर अभियुक्तों को 45 दिन का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। एक अभियुक्त लालू प्रसाद पुत्र बेचे लाल को आर्म्स एक्ट के तहत तीन साल का कारावास व पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना न अदा करने पर अभियुक्त को एक माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी। जेल में बिताई गई अवधि सजा में समायोजित होगी।