भीतरगांव विकास खंड के तीस से अधिक गांवों के निवासियों के लिए जीवनदायिनी रिंद नदी की जलधारा दो भागों में बंट गई है। पानी सूख जाने से इसके किनारे पड़ने वाले गांवों के किसान खेतों में बोई फसलों की सिंचाई कैसे करेंगे इस आशंका से परेशान हैं।
कानपुर देहात जिले की सीमा से होकर बिधनू, पतारा और भीतरगांव विकास खंडों के गांवों की सीमा को छूती हुई सीधा फतेहपुर में यमुना नदी में जाकर मिलने वाली रिंद नदी पूरे वर्ष बहती है।
स्थानीय निवासियों संतोष अवस्थी (रावतपुर), पप्पू यादव (मदनवा पुरवा), महेंद्र विश्वकर्मा (गौरी-ककरा), श्रीराम यादव (देवपुरा), राकेश निषाद (क्योंटरा) और बड़े पाल (करचुलीपुर) ने बताया कि बीते कई वर्षों से कम बरसात होने के चलते नदी में मई-जून के महीनों में पानी का बहाव थम जाता रहा है।
लेकिन, इस वर्ष दिसंबर के महीने में ही यह स्थिति पैदा हो गई है। रिंद नदी के किनारे ऊंची-नीची भूमि में बोई जाने वाली फसलों की सिंचाई के लिए एकमात्र साधन नदी का पानी है।
इसके चलते नदी के दोनों छोरों पर बड़ी संख्या में पंपसेटों के जरिये पानी निकालकर फसलों की सिंचाई की जाती है। लेकिन, इस समय नदी की जलधारा सूख जाने से पंपसेट नहीं चल पा रहे हैं।
वहीं, नदी के पानी में पलने वाले जलीय जीवों के लिए भी खतरा पैदा हो गया है। पानी कम हो जाने से कछुआ, मछली और अन्य जलीय जीव मर रहे हैं। पशु चिकित्सक डा. अमरेश कुमार ने बताया कि ठहरा हुआ पानी प्रदूषित हो जाने से आगे चलकर मवेशियों की सेहत के लिए भी नुकसानदायक साबित हो सकता है।