सर्दी के तीखे तेवरों ने गरीबों के लिए मुसीबत पैदा कर दी है। गांवों में अलाव जलाने और ईंधन के लिए लोग लकड़ियों की जुगाड़ करते दिखाई दे रहे हैं।
वहीं कसबों और सार्वजनिक स्थानों में अभी तक प्रशासन की ओर से अलाव जलवाने की व्यवस्था शुरू नहीं कराई गई है। दिसंबर महीने की शुरुआत में ही दो दिन हल्की बारिश हुई थी।
इसके बाद क्रमश: दो-तीन बार कोहरा गिरा और फिर मौसम साफ हो गया। लेकिन, पश्चिमी हवाएं चलने से गलन का प्रकोप बढ़ गया है। बीते चार दिनों से पारा लगातार नीचे लुढ़कता जा रहा है। बुधवार की शाम गलन भरी बर्फीली हवाएं चलीं।
इधर, मौसम का रुख भांपकर ग्रामीण अलाव जलाने और ईंधन के लिए जंगल से लकड़ियां इकट्ठी करने में जुटे हुए हैं। वहीं, कड़ाके की सर्दी और कोहरे की आड़ में लकड़ी माफिया भी सक्रिय हो गए हैं।
वह सार्वजनिक स्थानों पर खड़े जंगली पेड़ों की लकड़ी काटकर उसे लकड़ी के टालों में बेंच रहे हैं। रामसारी गांव के पास स्थित चीनी मिल के जंगल के अलावा रेउना खारजा नहर, धरमपुर बंबा, रिंद और पांडु नदियों के किनारे के अलावा सड़कों के किनारे खड़े जंगली पेड़ों के अलावा फल और छायादार पेड़ों की लकड़ी जमकर काटी जा रही है।