रिंद नदी के किनारे बसे गांव रावतपुर (चौधरियान) में बीते दो दिनों के दौरान नौ मवेशियों की मौत हो गई, इनमें सात गोवंश शामिल हैं। मवेशियों की एकसाथ मौत होने से पशुपालकों में दहशत है। उन्होेंने बताया कि यह स्थिति मवेशियों का टीकाकरण कराने के बाद शुरू हुई है। इधर, मवेशियों की मौत की जानकारी होने पर चौकी पुलिस और पशु चिकित्सक गांव पहुंचे। उन्होंने मामले की जांच-पड़ताल और मृत मवेशियों का पोस्टमार्टम कराने की पेशकश की। लेकिन, पशुपालक के मना कर देने पर पुलिस ने मवेशियों के शवों को जेसीबी मंगवाकर गड्ढा खोदवाने के बाद दफन करवा दिया।
गांववालों ने बताया कि उनके यहां पशुपालन विभाग की टीम ने दो दिन पहले, मंगलवार को मवेशियों में खुरपका और मुंहपका का टीकाकरण किया था। इसके अगले ही दिन बुधवार को गांव निवासी नीलू यादव के एक पड़वा और धोबीलाल दिवाकर की एक कीमती भैंस की मौत हो गई। जिसपर गांववालों ने खास ध्यान नहीं दिया।
इधर, गांव के ही रामसनेही कुरील के दो बछड़ों की बुधवार की शाम जबकि, पांच गायों की मौत गुरुवार को हो गई। पंद्रह घंटे के भीतर एक ही पशुपालक के सात मवेशियों की मौत होने की सूचना पर गांव में दहशत फैल गई। इसकी सूचना पुलिस और प्रशासन को दी गई।
भीतरगांव चौकी इंचार्ज पंकज मिश्रा तत्काल रावतपुर (चौधरियान) गांव पहुंचे। उन्होंने अधिकारियों को सूचना देने के साथ ही भीतरगांव से पशु चिकित्सक को भी मौके पर बुलवाया। पशु चिकित्सक डा.ओम प्रकाश वर्मा ने बताया कि वह अपनी टीम के साथ गांव गए थे। बताया कि उन्होंने मृत पशुओं का पोस्टमार्टम करने की पेशकश की। लेकिन, पशुपालक रामसनेही कुरील ने पोस्टमार्टम कराने से मना कर दिया और वह मौके से चला गया। इसके चलते पुलिस की मौजूदगी में मवेशियों के शवों को दफन करवा दिया गया है। पशु चिकित्सकों के मुताबिक मवेशियों की मौत टीकाकरण से नहीं हुई है। मौके पर पहुंची पुलिस और पशुपालन विभाग की टीम ने बताया कि रामसनेही कुरील के सभी मवेशी खुले मैदान में बांधे जाते हैं।
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