प्रवचन करतीं आचाय्र रेखा शास्त्री
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जो अपने निश्चय पर अडिग रहता है, वह ध्रुव तारे की तरह हमेशा चमकता है, और अमर हो जाता है। मलासा कसबे के महोलिया गांव में श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन आचार्य रेखा शास्त्री ने कही।
ध्रुव चरित्र की कथा सुनाते हुए कहा कि जीवात्मा उत्तानपाद है। राजा उत्तानपाद की सुरुचि और सुनीति दो पत्नियां थीं। सुनीति यानि भगवान के प्रति सुंदर नीति और सुरुचि यानि अपने मन की रुचि।
सुनीति से ध्रुव और सुरुचि से उत्तम नामक पुत्र पैदा हुए। जब व्यक्ति अपनी रुचि के अनुसार कार्य करता है, उसे उत्तम यानी ज्यादा अंधकार मिलता है और जब भगवान के प्रति सुंदर नीति अपनाता है, तो उसे ध्रुव की तरह दृढ़ता और प्रकाश मिलता है। उन्होंने ध्रुव-चरित्र के रोमांचक प्रसंग सुनाये। परीक्षित बलवान, वीरेंद्र यादव आदि ग्रामीण भी मौजूद रहे।