घाटमपुर (कानपुर देहात)। कोरोना वायरस के चलते वसंत नवरात्र में क्षेत्र के प्रमुख देवी मंदिरों में भक्तों का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित रहा। मुख्य गेटों पर बैरीकेडिंग कराने के साथ पुलिस तैनात रही। भक्त भी घर से निकलकर मंदिर नहीं गए। कस्बा स्थित चतुर्थ सिद्धपीठ कूष्मांडा देवी सहित अन्य मंदिरों में सन्नाटा दिखाई दिया। मेला परिसर की सभी दुकानें भी बंद रहीं।
घाटमपुर स्थित कूष्मांडा देवी की मान्यता नौ दुर्गा के चौथे स्वरूप के रूप में है। प्रदेश में कूष्मांडा देवी का एकमात्र मंदिर घाटमपुर में है। इसके चलते शारदीय और वसंत नवरात्र में देश-प्रदेश के कोने-कोने से लोग यहां देवी के दर्शन करने आते हैं। लेकिन, कोरोना के चलते मंदिर में भक्तों का प्रवेश वर्जित कर दिया गया है।
पतारा क्षेत्र के बरनांव गांव स्थित कथरी देवी मंदिर, पतारा स्थित काली देवी, तिलसड़ा गांव की आशामाई, तेजपुर गांव की तेजेश्वरी देवी के साथ भदरस और बिरहर गांवों के भद्रकाली देवी मंदिरों में भक्तों का प्रवेश बंद रहा। भीतरगांव समेत गंभीरपुर, अमौर, बरईगढ़, कुड़नी, गहोलिनपुर और बीहूपुर समेत अन्य गांवों में स्थित प्रमुख देवी मंदिरों में भक्तों को लॉकडाउन होने की सूचना देकर पूजा करने नहीं जाने दिया गया।
देवी भक्तों ने बताया कि कोरोना महामारी से निपटने के लिए उन लोगों ने प्रधानमंत्री की ओर से घोषित किए गए 21 दिन के लाकडाउन का पालन करने की शपथ ली है। इसके चलते वह अपने घरों में कलश स्थापना करने के साथ देवी की पूजा-अर्चना करेंगे।
मंदिरों और घरों में कन्याभोज नहीं कराएंगे
कोरोना के चलते किए लॉकडाउन को ध्यान में रखते हुए देवी भक्तों ने नवरात्र में कन्याभोज, भंडारा और सार्वजनिक रूप से प्रसाद वितरण न करने का भी फैसला लिया है। कई महिला भक्तों ने बताया कि नवरात्र में वह अपने घरों पर कन्या भोजन नहीं कराएंगी। देवी भागवत पाठ और हवन-पूजन के कार्यक्रमों में सिर्फ घर के सदस्य ही शामिल रहेंगे। देवी भक्तों ने बताया कि हालत सामान्य होने के बाद सामूहिक भोज और प्रसाद वितरण के आयोजन कराएंगे।