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फूल बरसा कर जुलूस एमोहम्मदी का स्वागत

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kanpur dehat muslim - फोटो : GHATAMPUR
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घाटमपुर (कानपुर)। हजरत मोहम्मद साहब की यौमे पैदाइश के उपलक्ष्य में रविवार को कस्बे में जुलूस ए मोहम्मदिया निकाला गया। बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। रास्ते में जगह-जगह फूल बरसाकर स्वागत किया गया और साथ चल रहे लोगों को जलपान कराया गया।
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दोपहर बाद कस्बे के मोहल्ला शेखवाड़ा के बगिया मैदान से जुलूस शुरू हुआ। जुलूस ए मोहम्मदिया के अध्यक्ष साबू कुरैशी की अगुवाई में प्रमुख रूप से पेश इमाम (शहर काजी) मौलाना सरताज रजा, खलीफा नदीम इलाही, छिद्दू खलीफा, नगर पालिका के सभासद मो.अजमेरी, इखलाक पहलवान, कमर जिया, इलियास कुरैशी, बदरुद्दीन (तुत्तल), कमर अंसारी, मौलाना कमाल आसिफ, नफीस कुरैशी और तौफीक पहलवान सहित अन्य लोगों ने जुलूस की व्यवस्था का संचालन किया।
बगिया मैदान से चलकर जुलूस कस्बे के जनता इंटर कालेज के पास से होकर मुगल रोड और वहां से नगर पालिका रोड, पुराना अस्पताल रोड और सदर बाजार होकर वापस बगिया मैदान पहुंचा। जुलूस में शामिल अच्छी झांकियों और उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली टीमों को पुरस्कृत किया गया। उप्र पिछड़ा वर्ग आयोग की पूर्व सदस्य सोमवती संखवार जुलूस में शामिल हुईं। नगर पालिका रोड, कल्लू होटल, बगिया मैदान और पुराना अस्पताल रोड पर स्टाल लगाकर जुलूस का स्वागत किया गया। एसडीएम वरुण कुमार, तहसीलदार विजय यादव, नायब तहसीलदार हरिश्चंद्र सोनी के साथ ही शांति और सुरक्षा व्यवस्था के लिए सीओ रविकुमार सिंह के साथ कोतवाल रणबहादुर सिंह और कसबा चौकी इंचार्ज सत्यपाल सिंह भारी पुलिस बल के साथ जुलूस में मौजूद रहे।
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कस्बा रेउना में मौलाना यूसुफ रजा की अगुवाई में जुलूस ए मोहम्मदी निकाला गया। अजीज खां, रहीश खां, डा.रामबाबू संखवार, रियाज खां और राजू मिश्रा शामिल रहे। पतारा के लालपुर में मौलाना सरताज और जहांगीराबाद में मौलाना अब्दुल सत्तार की अगुवाई में बारावफात के जुलूस निकाले गए। नंदना और भदरस के अलावा सजेती इलाके के बरीपाल और लहुरीमऊ गांवों में भी बारावफात के जुलूस निकाले गए। भीतरगांव के साढ़ और बेंहटा-बुजुर्ग इलाके में मोहम्मद साहब के जन्मदिन पर बारावफात का जुलूस निकाला गया।
एक ओर जहां जुलूस ए मोहम्मदिया में हरे रंग और चांद-तारे के निशान वाले झंडे दिखाई दे रहे थे। जुलूस में सबसे आगे कुछ युवक देश का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा लहराते चल रहे थे। कई गाड़ियों पर भी राष्ट्रीय ध्वज शान से लहराते दिखाई दिए। जुलूस के साथ एक वाहन पर मोहम्मद साहब की यादगार में मदीने की मस्जिद का माडल भी रखा गया था।
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