कानपुर देहात। सरकार के सख्त रुख के बाद भी मंगलवार को लेखपालों का धरना जारी रहा। कलक्ट्रेट परिसर में धरना दे रहे लेखपाल शासन के खिलाफ नारेबाजी करते रहे। वहीं सरकार पर उनकी आवाज को दबाने का आरोप लगाया। लेखपालों के धरने से राजस्व कार्यों के साथ ही आय, जाति निवास सहित अन्य कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
वेतन उच्चीकरण, वेतन विसंगति, पेंशन विसंगति, भत्तों में बढ़ोतरी, आधार भूत सुविधाएं एवं संसाधन जैसी आठ सूत्रीय मांगों को लेकर लेखपाल करीब एक सप्ताह से धरना दे रहे हैं। कार्य बहिष्कार के साथ धरने पर बैठे लेखपालों से राजस्व सहित आय, जाति, निवास जैसे कार्य प्रभावित हो रहे हैं। वहीं स्कूल, कालेज खुलने पर विद्यार्थी छात्रवृत्ति के लिए आवेदन कर रहे हैं, लेकिन प्रमाण पत्र न मिलने से उन्हें भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। शासन के सख्त रुख के बाद भी मांगों पर अड़े लेखपाल करीब एक सप्ताह से धरने पर बैठे हैं जबकि कलक्ट्रेट परिसर में धरने के दूसरे दिन मंगलवार को लेखपालों ने शासन पर उनकी आवाज दबाने का आरोप लगाया।
संगठन के जिला अध्यक्ष बृजेश कुमार दीक्षित ने बताया कि उनकी जायज मांगों को सरकार की ओर से दरकिनार किया जा रहा है। जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मांगे पूरी न होने तक धरना अनवरत जारी रहेगा। इसके बाद भी यदि हमारी मांगे नहीं मानी जाती है तो अन्य संगठनों को साथ लेकर लेखपाल आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे। इस व वहीं, शासन के निर्देश के बाद भी धरने पर डटे लेखपालों के विरुद्ध जिला प्रशासन ने तैयारी शुरू कर दी है। मंगलवार को अकबरपुर तहसील के 20 लेखपालों को एसडीएम ने नोटिस जारी कर बर्खास्तगी के चेतावनी दी है। इससे लेखपालों में हडकंप की स्थिति है।
कलक्ट्रेट परिसर में धरना दे रहे अकबरपुर तहसील अध्यक्ष सुधीर दुबे, महामंत्री राजाबाबू कटियार, कृष्ण मुरारी, गणेश शंकर, अजय वर्मा, प्रशिक्षु लेखपाल कल्पना गौतम, प्रेम चंद्र, रितेश तिवारी, श्रवण कुमार, गिरजेश कुमार, दिशू मिश्रा, चिरंजीत श्रीवास्तव, सचिन कुमार, वरूण कटियार, विजय प्रताप सिंह, धर्मेंद्र, विकास, अभिषेक, संदीप, पूजन देवी आदि को एसडीएम परवेज अहमद ने नोटिस जारी कर मुकदमा दर्ज कराने की चेतावनी के साथ ही बर्खास्तगी का अल्टीमेटम दिया है।