हवाओं के रुख बदलने और गर्मी का प्रकोप बढ़ने से मौसम एकबार फिर छलावा देता दिख रहा है।
झमाझम बारिश न होने से खेतों में बोई गई खरीफ की फसलों को झटका लग रहा है। सबसे अधिक समस्या धान बोने वाले किसानों को है।
किसानों ने बताया कि जुलाई में सितंबर-अक्तूबर जैसी बारिश चिंता का सबब है। मौसम वैज्ञानिकों की भविष्यवाणी पर विश्वास करके उन्होंने खेतों में धान की फसल रोप दी है। लेकिन, बारिश न होने से निजी संसाधनों के जरिए उसकी सिंचाई करने को मजबूर हैं।
धानपट्टी इलाके वाले गांवों साढ़, अमौर, कोरथा, पालपुर, बारीगांव, पसेमा, उमरी, शूलपुर, गूजा, शिकहुला, बौहार, मड़ेपुर, मुरलीपुर, हस्कर, भरथुआ निवादा, बरईगढ़, कुड़नी, तिवारीपुर, शाहपुर, महोलिया, गौरी-ककरा, बेंहटा-बुजुर्ग, सतरहुली, रार, पड़री-लालपुर, धरमपुर, संचितपुर, ककरहिया, बरनांव, नगेलिनपुर, धरमपुर, चतुरीपुर, किवड़िया, धरमंगलपुर और सिरोह-सरांय समेत अन्य गांवों में बड़े पैमाने पर धान की फसल बोई गई है। खरीफ की अन्य फसलें भी प्रभावित हो रही हैं।
भदरस, राहा, जलाला, बेंदा, शेरपुर, अयोध्यापुर, चंवर, मोतीपुर, बंबुरहा, वीरपुर, मिरानपुर, चिल्ली, मदनपुर, स्योंढ़ारी, लौकहा, रतनपुर, बारादौलतपुर और दिवली समेत कई गांवों के किसानों ने बताया कि समय-समय पर बारिश न होने से खेतों में बोई गई कुम्हड़ा और सब्जियों की फसलें सूखने से समस्या पैदा हो रही है।