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21 फीसदी पर सिमटी गेहूं बुवाई

Sun, 20 Nov 2016 02:27 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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जमालपुर गांव के समीप गेहूं बुवाई न होने से खाली पड़े खेत। - फोटो : अमर उजाला
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500 व 1000 की नोटबंदी का असर अब खेती-किसानी में दिखने लगा है। किसानों को खाद-बीज न मिलने से गेहूं सहित अन्य फसलों की बुवाई रफ्तार थम गई है। गेहूं बुवाई का उपयुक्त समय होने के बावजूद किसान रुपये न होने से सिस्टम को कोस रहे हैं। कृषि विभाग के आंकड़ों की मानें तो अभी तक जिले में सिर्फ 21 फीसदी गेहूं की बुवाई हो सकी है।
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बीते आठ नवंबर को प्रधानमंत्री की ओर से 500 व 1000 के नोट बंद होने का फरमान आने के बाद हर तरफ अफरातफरी मची है। हर रोज बैंकों में सुबह से सैकड़ों लोग लाइनों में नोट बदलने के लिए डट जाते हैं, लेकिन दोपहर तक बैंकों में नोट खत्म होने पर जरूरतमंदों को रुपये नहीं मिल पाते हैं। ऐसे में रबी फसलों की जुताई-बुवाई का उपयुक्त समय होने के चलते किसान परेशान हैं।


कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जिले में 2016-17 के दौरान गेहूं बुवाई का एक लाख 27 हजार 271 हेक्टेयर लक्ष्य है, लेकिन नोटबंदी के चलते आधा नवंबर बीतने पर भी सिर्फ 26726 हेक्टेयर गेहूं फसल की बुवाई हो सकी है, जो लक्ष्य का मात्र 21 फीसदी है। यही हाल जौ की बुवाई का है।
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वर्ष 2016 के 6505 हेक्टेयर लक्ष्य के सापेक्ष 55 फीसदी बुवाई हो सकी है। रबी वर्ष में बोई जाने वाली सभी फसलों का आंकलन करें तो कुल बुवाई का प्रतिशत 50.83 फीसदी पहुंच सका है। किसान नोटबंदी के चलते खाद-बीज के लिए तरस रहे हैं। वहीं कृषि अधिकारियों की मानें तो नवंबर गेहूं बुवाई के लिए उपयुक्त समय है। इसके बाद लेट प्रजाति की फसलों की बुवाई हो सकती है।


गेहूं बुवाई का उपयुक्त समय नवंबर व मध्य दिसंबर तक माना जाता है। किसान गेहूं की लेट बुवाई कर बढ़िया पैदावार ले सकते हैं।  - रमाकांत तिवारी (उपकृषि निदेशक)

अकबरपुर निवासी किसान छोटे ने बताया कि उसने बलकट पर पांच बीघा खेत ली है, जिसमें आलू व लाही की फसल बोई है। नोटबंदी के चलते फसल में खाद के लिए भटकना पड़ रहा है। सिंचाई का भी संकट बना हुआ है।

बाढ़ापुर निवासी किसान हरिश्चंद्र का कहना है कि दो बीघा खेत में गेहूं बुवाई की तैयारी कर रहे थे। इसी दौरान नोटबंदी ने सब कुछ तबाह कर दिया। हर रोज नोट बदलने के लिए बैंकों में लाइन लगानी पड़ती है। ऐसे में गेहूं की बुवाई में देरी हो रही है।

हिम्मापुरवा निवासी किसान किशन यादव बताते हैं कि आठ बीघा खेतों में गेहूं की बुवाई के लिए पलेवा व जुताई करा ली है, लेकिन नोटबंदी के चलते बीज व खाद खरीदने के लिए फुटकर रुपये नहीं हैं। ऐसे में पूरी मेहनत बेकार हो रही है।

नवीपुर निवासी किसान सोनेलाल ने बताया कि दो बीघा खेत में गेहूं लगाने के लिए जुताई कराई है। घर में खेती पर ही सब कुछ आश्रित हैं। ऐसे में नोटबंदी ने परेशान कर दिया है। अगर समय पर बुवाई न हुई तो पैदावार प्रभावित होगी। ऐसे में परिवार पालना मुश्किल होगा।
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