रनियां कसबे के हाईवे पर सिक्सलेन बनने से वाहनों की स्पीड तो बढ़ गई लेकिन आसपास के लोगों के लिए मुसीबत बनी हुई है। फुट ओवरब्रिज न बने होने से आए दिन कोई न कोई तेज रफ्तार वाहनों का शिकार बनता है। एनएचआई के अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे हैं।
इसका खामियाजा यहां के लोगों को जान देकर चुकाना पड़ रहा है। बता दें कि औद्योगिक क्षेत्र के रूप में मशहूर रनियां कसबे से नेशनल हाईवे 2 गुजरा है। आवासीय क्षेत्र के लोगों के लिए अंडरपास व ओवर ब्रिज की व्यवस्था नहीं है। हाईवे पर दोनों ओर कैच बैरियर लगे होने से कसबा दो भागों में बंटा है। भीड़भाड़ वाले हिस्से में अंडरपास नहीं बनाया गया।
इन सब समस्याओं पर लोगों ने समस्याओं से जूझते हुए प्रधानमंत्री को पत्र भेजे थे। सांसद भोले सिंह के माध्यम से केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के नाम पर एक पत्र दिया गया था। पांच किलोमीटर के दायरे में कैच बैरियर बंद करने के बाद लोगों ने फुट ओवरब्रिज पास करने की मांग की थी।
पत्र मिलने के बाद सांसंद भोले सिंह ने रनियां की समस्या को केंद्रीय मंत्री से बातचीत की थी। वहीं, डीएम के आदेश पर अकबरपुर एसडीएम जयनाथ यादव ओरियंटल की टीम के साथ मंटोरा चौराहे, चिटिकपुर, किशरवल रोड, रनियां पड़ाव सरवनखेड़ा मार्ग सहित कई जगहों का सर्वे भी किया था, लेकिन अभी तक काम शुरू नहीं किया गया।
रनियां में राहगीरों को हाइवे पार करना मौत को दावत देने से कम नहीं है। यहां आए दिन मौतें हो रही हैं। पिछले वर्ष लगभग आधा सैकड़ा से भी ज्यादा लोगों को दुर्घटना में अपनी जान गंवानी पड़ी थी। कानपुर से दिल्ली जाने वाले मार्ग पर रनियां क्षेत्र बसा हुआ हैं।
गत शनिवार को बारा गांव की किशोरियां कंचन और खुशबू अपने जीजा के घर में तिलक समारोह में शामिल होने के जगह मौत के मुंह में चली गई।
इसी खूनी हाईवे ने आधा सैकड़ा से अधिक लोगों की जिंदगियां छीन ली थी। एक हादसा हुआ था, जिसमें इलाहाबाद से मुंबई कार से जा रहा परिवार ट्रक से टकराकर मौके पर खत्म हो गया था। पांच लोगों की मौत कार में जलकर हुई थी। जनवरी माह के प्रथम सप्ताह में किशरवल रोड में शेरपुर तरौंदा निवासी दिवाकर तिवारी सड़क हादसे का शिकार हो गया था। रनियां विष्णु गुप्ता, श्रवण कु शवाहा, अनुराग चतुर्वेदी व डा. दिलीप गुप्ता आदि ने बताया कि समस्या पर जनप्रतिनिधि से लेकर अफसर ध्यान नहीं दे रहे हैं।