जिले को खुले में शौच मुक्त करने के अभियान में धांधली व लापरवाही करने वालों पर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। ओडीएफ करने के लिए समय कम है और लापरवाही थम नहीं रही है। इस पर कार्रवाई का डंडा चलना शुरू हो गया है। अकबरपुर व झींझक ब्लॉक के दो प्रधानों व एक पंचायत सचिव से स्पष्टीकरण तलब किया गया है।
22 मार्च तक जिले को खुले में शौचमुक्त करना है। जिले के 912 राजस्व गांव में अभी तक केवल 62 गांव ओडीएफ घोषित हुए हैं। ऐसे में पंचायती राज विभाग के सामने निर्धारित समय में शौचालयों का निर्माण पूरा कराना बड़ा लक्ष्य है। अब झींझक ब्लॉक के औरंगाबाद भोलाहुलास गांव में स्वच्छ भारत मिशन के तहत निर्मित हो रहे शौचालयों के सत्यापन में बड़ी धांधली उजागर हुई। जिला कंसलटेंट प्रदीप कुमार वर्मा ने डीपीआरओ को दी रिपोर्ट में बताया कि ग्राम पंचायत को शौचालय निर्माण के लिए दिया गया धन लाभार्थियों के खाते में नहीं दिया गया उसे फर्म को भुगतान कर दिया गया। उसी फर्म ने गांव में मानक विहीन शौचालयों का निर्माण करा दिया। गड्ढों के निर्माण में चिनाई में सीमेंट की जगह मिट्टी का इस्तेमाल किया गया है।
शौचालयों में टीन के दरवाजे लगाए गए हैं। इसके साथ ही लाभार्थियों से 500-500 रुपये शौचालय आवंटित करने के नाम पर वसूले गए हैं। वहीं अकबरपुर ब्लॉक के नौरंगाबाद ग्राम पंचायत में 40 शौचालयों का धन दिया गया था। जिसमें सत्यापन में पाया गया कि गांव में 12 लाभार्थियों के शौचालय लगभग पूरे होने के बाद भी उन्हें दूसरी किश्त नहीं दी गई है।
डीपीआरओ अजय कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि दोनो मामलों में प्रधानों व सचिव को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण तलब किया है। वहीं दोनो प्रधानों को
पद से हटाने की चेतावनी दी है। जवाब आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।