गुटैहा तालाब की खुदाई का नहीं शुरु हो सका काम।
कानपुर देहात। बारिश के पहले जल संरक्षण के लिए तैयार किए जा रहे 125 तालाबों में धन की कमी आड़े आ गई, जिससे काम बंद हो गया। मजदूरों का करीब 46 लाख रुपये का भुगतान लटका है। फिलहाल बारिश के पहले अब तालाबों की खुदाई कर तैयार कर पाने की उम्मीद कम है।
जिला प्रशासन ने जल संरक्षण को लेकर तालाबों की खुदाई मनरेगा के तहत कराने की योजना बनाई थी। इसके लिए जिले के सभी दस ब्लाकों में मिलाकर 125 ऐसे तालाब चिंहित किए गए थे, जिनका स्वरूप बिगड़ा हुआ था या फिर उनमें अवैध कब्जे थे। अप्रैल के पहले सप्ताह में ऐसे तालाबों को कब्जा मुक्त करवा कर उनमें खुदाई का काम शुरू कराया गया। एक तो उसी समय गेहूं की कटाई का काम होने से मनरेगा श्रमिक मुश्किल से मिले। जैसे-तैसे तत्कालीन डीसी मनरेगा पीएन दीक्षित ने पूरे जिले में करीब नौ हजार श्रमिक लगा कर काम शुरू कराया दिया था।
उनके प्रयास से 94 तालाबों में काम शुरू हो गया। इस बीच श्रमिकों की मजदूरी का धन नहीं आया। यह धन पिछले छह माह से रुक-रुक आ रहा है। ऐसे में श्रमिक मनरेगा के तहत खोदे जा रहे तालाबों में काम करना बंद कर चुके हैं। अब कुछ ही तालाबों में दो-चार सौ श्रमिक खुदाई की खानापूरी कर रहे हैं।
विभागीय सूत्रों की मानें तो छह माह में विभिन्न कामों को मिलाकर मनरेगा के तहत काम करने वाले श्रमिकों का 46 लाख रुपये बकाया है। अब मनरेगा की जगह श्रमिक वहां काम करना पसंद कर रहे हैं। जहां उन्हें रोज मजदूरी मिल सके। इधर, बारिश से पहले तालाब तैयार करने की जिला प्रशासन की योजना कामयाब होती नहीं दिख रही है।