कथरी गांव में स्थापित कात्यायनी देवी की मूर्ति।
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नवरात्र में षष्ठी पर शुक्रवार को मौहर देवी मंदिर में आकर्षक झांकी सजायी गई। इस मौके पर आचार्य श्याम बिहारी द्विवेदी ने प्रवचन में मां कात्यायिनी का वृतांत सुनाया। वहीं कथरी के कात्यायनी देवी मंदिर में हजारों श्रद्धालुओं ने दर्शन-पूजन किए।
पुखरायां के मौहर देवी मंदिर पर शारदीय दुर्गा पूजा एवं नवरात्र मेला का आयोजन किया गया है। आचार्य ने कात्यायिनी देवी का वृतांत सुनाते हुए बताया कि कात्यायन ऋषि की तपस्या से प्रसन्न होकर वरदान मांगने पर मां दुर्गा ने उनके कुल में जन्म लिया था। इससे उनको कात्यायिनी नाम से जाना गया। नवरात्र में षष्ठी के दिन उनके इस रूप का पूजन किया जाता है।
अमरौधा प्रतिनिधि के अनुसार ब्लाक अमरौधा के कथरी गांव में कात्यायनी देवी मंदिर पर हजारों भक्तों ने लाइन में लगकर दर्शन किए। महंत श्रीबाबू भट्ट ने बताया कि गांव के राजाराम यादव ने सुनाव नाले से देवी मूर्ति लाकर ऊंचे टीले पर स्थापित की थी।
कालांतर में शाहजहांपुर के तत्कालीन राजा गजाधर दुबे ने पुत्र-प्राप्ति की मन्नत पूरी होने पर भव्य मंदिर का निर्माण कराया, यहां दस्यु सरगना भी घंटे व पताकाएं चढ़ाने आते रहे हैं। फूलन देवी सांसद बनने के बाद यहां हवन-पूजन करने आई थीं।
भोगनीपुर से इटावा रोड पर शाहजहांपुर गांव से छह किलोमीटर दक्षिण की ओर कथरी गांव के टीले पर मंदिर बना है। मां दुर्गा का षष्ठम स्वरूप (विद्युत ऊर्जा) मानकर कात्यायनी देवी का पूजन किया जाता है।