जनपद के ककवन ब्लाक की आधी आबादी दशकों बाद भी शिक्षा के बुनियादी हक से वंचित है। एक ओर जहां परिषदीय स्कूलों में पठन-पाठन अधिकारियों-शिक्षकों की लापरवाही की भेंट चढ़ चुका है वहीं बुनियादी जरूरतों के अभाव में निजी शिक्षण संस्थानों भी अभी तक यहां नहीं खुल सके हैं।
इससे विकास खंड की हजारों बेटियां एकमात्र इंटर कालेज में 10 वीं तक पढ़कर घरों में चूल्हा-चौका करने को मजबूर हैं। ककवन में दशकों बाद भी बेहतर शैक्षणिक वातावरण की आस लगाए है, क्षेत्र में अभी तक कोई उच्च शिक्षण संस्थानों स्थापित न होने से विकास खंड की लड़कियों पर इसका सीधा प्रभाव पड़ रहा है। ब्लाक में कोई राजकीय इंटर कालेज, महाविद्यालय, आईटीआई, कौशल विकास केंद्र न खुलने क्षेत्र का विकास रुका पड़ा है।
बिजली, सड़क और पेयजल की समस्या के कारण निजी क्षेत्र के शिक्षण संस्थान भी ककवन क्षेत्र की ओर दिलचस्पी नहीं दिखा रहे। दसवीं के बाद पढ़ाई छोड़ने वाली छात्रा सुनैना ने बताया कि ककवन के एकमात्र डीपीएसएन कालेज में 12 वीं की वित्त विहीन कक्षाएं संचालित होती हैं, लेकिन अधिक फीस होने और सीमित विषय होने के कारण परिवारीजनों ने उसकी पढ़ाई बंद करा दी। इसी तरह पारुल, प्रियंका और विनीता ने बताया कि साइंस साइड का कोई कालेज उनके यहां न होने से उनके जैसी कई लड़कियां जिनके हाईस्कूल में अच्छे अंक पाए हैं, उन सभी ने पढ़ाई ही छोड़ दी हैं।
11 वीं का दाखिला बिल्हौर में होता है या फिर रसूलाबाद कानपुर देहात में, रोज आने जाने की समस्या है। इसके चलते परिवारीजनों ने उन्हें आगे पढ़ाने से ही मना कर दिया है। सरकार जब तक उनके लिय स्कूल बनवाएगी तब तक काफी समय गुजर जाएगा। उधर, कसिगवां जिला पंचायत सदस्य प्रतिनिधि और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रामलखन गौतम ने बताया कि यदि क्षेत्र के जनता उन्हें चुनती है तो एक साल के अंदर ब्लाक मुख्यालय में अत्याधुनिक इंटर कालेज का निर्माण करा दिया जाएगा।
सपा, बसपा के विधायकों ने सिर्फ ककवन की जनता को ठगने का काम किया है। इसी तरह ककवन जिला पंचायत सदस्य नीतू अवस्थी के पति अखिलेश अवस्थी ने बताया कि जिला योजना के माध्यम से कसबे के एकमात्र स्कूल के उच्चीकरण का प्रस्ताव जिलाधिकारी के मार्फत शासन को भेजकर ब्लाक की लड़कियों की शिक्षा के बढ़ाने के प्रयास किए जाएंगे।