दिसंबर महीने के प्रथम सप्ताह में हुई बारिश ने किसानों को खुशी और गम दोनों लेकर आया। एक ओर जहां सूखे पड़े खेतों के लिए बारिश वरदान साबित हो रही है, वहीं गेहूं की बुवाई करने के लिए पलेवा कर चुके किसानों के चेहरों पर उदासी है।
उन्होंने बताया कि बारिश हो जाने से अब उनके खेतों में गेहूं की फसल की बुवाई कम से कम एक सप्ताह देरी से हो पाएगी। मालूम हो कि इस वर्ष मानसूनी बरसात औसत से एक काफी कम हुई है।
इसके चलते तहसील क्षेत्र में सूखे के हालात हैं। खेतों में बोई गई खरीफ की 60 फीसदी से अधिक फसलें बर्बाद हो गई थीं। जबकि, सूखे पड़े खेतों में पलेवा के बिना रबी की फसल भी बोया जाना संभव नहीं है।
किसानों ने बताया कि 15 नवंबर से 05 दिसंबर के बीच रबी की मुख्य फसल गेहूं की बुवाई का पीक सीजन होता है, जिसके चलते वह सूखे पड़े खेतों की पलेवा करने में दिन-रात जुटे हुए हैं।
बताया कि बारिश हो जाने से उनकी मेहनत पर पानी फिर गया है। कहा कि पलेवा किए गए खेतों में बारिश का पानी भर जाने से फसल बोने के लिए उनको अब कम से कम एक सप्ताह इंतजार करना पड़ेगा।
इधर, मंगलवार की शाम से अचानक मौसम का रुख परिवर्तित हो गया है। गत दिवस धूलभरी आंधी आने के बाद कई जगहों पर ओले गिरे और छिटपुट बरसात भी हुई। बारिश का क्रम रुक-रुककर देर रात तक जारी रहा।
जबकि, बुधवार की सुबह भी बादलों की गरज-चमक के बीच कई जगहों पर हल्की से लेकर मध्यम दर्जे की बारिश हुई। किसानों ने बताया कि बारिश से असिंचित क्षेत्र को काफी लाभ हुआ है।
राजकीय कृषि बीज भंडार के प्रभारी रामनरेश सिंह भदौरिया ने बताया कि बुधवार को बीज भंडार में पांच हेक्टेयर क्षेत्रफल के लिए चने की बिक्री हुई। बताया कि किसान असिंचित इलाके मेें अभी चना की बुवाई कर सकते हैं।