फूलों की खेती से जुड़े किसानों का कहना है कि जितने रक्बे में आनाज और अन्य फसल की खेती करके तीन वर्षों में फायदा कमाया जा सकता है। उतने रक्बे में फूलों की खेती कर एक वर्ष में ही लाभ हो रहा है।
भीतरगांव विकास खंड के गौरी-ककरा, कुटियारामपुर, अमौर, सचौली, कुड़नी, गंभीरपुर, कुंदौली, बेहंटा-बुजुर्ग, एक्घरा, असवानगर, रातेपुर, खदरी, दौलतपुर और बारीगांव सहित तकरीबन 20 गांवों में छोटी जोत वाले अधिकांश किसान खेतों में रबी-खरीफ और जायद की फसलें उपजाने के साथ ही फूलों की खेती में रुचि ले रहे हैं।
तमाम संपन्न किसानों ने भी अपने खेतों में फूलों के पौधे लगावा दिए हैं। खेतों में गेंदा और गुलाब के साथ ही अन्य प्रजातियों के देशी-विदेशी प्रजाति के पौधे फूलों से लदे खड़े हैं।
किसानों ने बताया कि शाम को फूलों की तुड़ाई कराने के बाद उनको अगले दिन भोर में ही शहर में बेंचने के लिए भेज दिया जाता है। इस क्षेत्र के किसान कानपुर में नौबस्ता और रामादेवी की फूल मंडियों में माल बेंचते हैं।
किसानों ने बताया कि वह मौसम और मांग को ध्यान में रखते हुए खेतों में संबंधित प्रजातियों के फूलों का उत्पादन करने में रुचि रखते हैं। बताया कि गेंदा और गुलाब के फूलों की मांग पूरे वर्ष रहती है।
किसानों के मुताबिक जाड़े में फूलों के खिलने की रफ्तार धीमी पड़ जाती है। जबकि, बसंत और गर्मी के मौसम में खिलने वाले फूल काफी भड़कीले होते हैं। उन्होंने बताया कि नवंबर के अंतिम सप्ताह से सहालग शुरू हो गई है।
जिससे बाजार में फूलों की मांग बढ़ने के साथ ही उनका भाव भी बढ़ गया है।