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विद्यालय की मेस में साफ-सफाई की अनदेखी

Wed, 22 Feb 2017 01:11 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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बीमार - फोटो : अमर उजाला
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जवाहर नवोदय विद्यालय, माती में सोमवार की रात अचानक बीमार पड़े बच्चों में आठ बच्चों के परिजन अपने घर लेकर चले गए। वहीं, मंगलवार को विद्यालय की मेस का हाल देखा गया तो साफ-सफाई का अभाव नजर आया।  खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की टीम ने विद्यालय की मेस में पहुंचकर खाने के नमूने भरे। मेस में साफ सफाई और अन्य व्यवस्थाएं बदतर नजर आईं। एक साथ इतनी संख्या बच्चों का बीमार पड़ना, लोगों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
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 गत सोमवार को जवाहर नवोदय विद्यालय माती में डिनर के दौरान श्रेया पाल, ईरम, सुप्रिया पुत्री भगवानदीन, विश्वास पुत्र भुवनेश, सोनम पुत्री श्याम मोहन, काजल पुत्री संजय यादव, वैष्णवी शर्मा पुत्री शिवनारायन,  अनुपमा पुत्री नरेश, आंचल पुत्री शैलेश शुक्ला समेत 11 बच्चे बीमार पड़े थे।
सभी को जिला अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। इस घटना से जहां बच्चों में भय बना है तो वहीं अभिभावकाें में भी आक्रोश है।
मंगलवार को मेस में साफ-सफाई की जानकारी की गई, अलग ही मामला नजर आया। बताया गया कि कैंटीन में ंप्रतिदिन 560 बच्चों के साथ 35 शिक्षक और कर्मियों के लिए भोजन बनता है। लेकिन खाना बनाने वाले कुक के सिर पर कैप नहीं थे, जबकि रसोइए चप्पल पहनकर खाना बना रहे थे। जहां बच्चे बैठकर खाना खाते हैं, उनकी टेबिल पर डस्ट जमा थी।
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मंगलवार की सुबह प्रियांशी, काजल, ईरम, सोनम, विश्वास, वैष्णवी, दीपिका व स्मृति को उनके माता-पिता आकर घर ले गए। सूचना पर अन्य बच्चों के अभिभावक भी पहुंच गए थे। सीएचसी अकबरपुर के मेडिकल आफीसर डा. विशाल दिवाकर ने नवोदय पहुंचकर बच्चों का परीक्षण किया। डाक्टर ने बताया कि बीमार होने का कोई खास कारण नहीं है, मौसम का असर है।


खाद्य सुरक्षा अधिकारियाें की टीम मंगलवार की सुबह जवाहर नवोदय विद्यालय पहुंची। अभिहित अधिकारी आरके गुप्ता, खाद्य सुरक्षा अधिकारी एसएस निरंजन, सुमांशु सचान ने आटा, अरहर की दाल सहित अन्य खाद्य पदार्थों के सैंपल भरे। खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने बताया कि खाने के नमूने भरकर भेजे गए हैं।


स्वास्थ्य मंत्रालय ने शिक्षा विभाग को विद्यालय में लगे हैंडपंप और आपूर्ति से आने वाले पानी की टेस्टिंग कराए जाने के निर्देश दिए हैं। जानकारी पर पता चला कि जवाहर नवोदय विद्यालय, माती में टंकी से आने वाले पानी की जांच आज तक नहीं की गई। यहां के प्राचार्य योगेंद्र भगत का तर्क है कि बच्चे आरओ का पानी पीते हैं। आपूर्ति वाला पानी खाना बनाने से लेकर अन्य कार्यों में प्रयुक्त किया जाता है लेकिन उनका तर्क साबित नहीं हो सका।
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