अभिलेखों की जांच पड़ताल करते एसडीएम व अन्य अधिकारी।
लखनऊ में मुख्यमंत्री के आवास पर फरियाद लेकर गए बलराम के गश खाकर गिरने के बाद शासन एक्शन में आया तो जिला प्रशासन की कुंभकरणी नींद भी टूट गई। गुरुवार को आननफानन में एसडीएम, सीओ समेत भारी संख्या में गए पुलिस बल ने कच्ची रोड को जुतवाकर पीड़ित के परिवार को जमीन पर कब्जा दिला दिया। तब कहीं जाकर बीते पांच साल से न्याय के लिए भटक रहे परिवार ने राहत की सांस ली।
मालतीपुर ग्राम सभा के मजरा खानपुर रसूलाबाद गांव निवासी बलराम शर्मा (43) पुत्र स्व. राम प्रसाद की गाटा संख्या 175 में दो बीघा तीन बिस्वा जमीन है। उसका आरोप था कि पांच साल पहले लोकनिर्माण विभाग के इंजीनियरों व ठेकेदारों ने जबरदस्ती उसके खेत से मालतीपुर-खानपुर रसूलाबाद रोड का निर्माण करा दिया। हालांकि जिस हिस्से में बलराम का खेत था वहां पक्की रोड तो नहीं बनी लेकिन मिट्टी डाल कर कच्ची रोड बना दी गई, जिससे वाहनों का आवागमन होता रहा।
लिखापढ़ी में रास्ता नहीं होने के बावजूद मनमाने तरीके से कच्ची रोड बनाने की शिकायत पीड़ित ने लेखपाल से लेकर जिलाधिकारी से की पर कोई सुनवाई नहीं हुई। बुधवार को लखनऊ फरियाद लेकर पहुंचे बलराम के बेहोश होने के बाद मामला मुख्यमंत्री तक पहुंचा तो शासन-प्रशासन जागा। गुरुवार की सुबह 11 बजे सीओ डेरापुर माजिद अब्सार, एसडीएम डेरापुर सुरजीत सिंह, एसओ मंगलपुर जेपी यादव, तहसीलदार राम दयाल, कानूनगो सुरेश मिश्रा व आधा दर्जन लेखपाल पुलिस कर्मियों के साथ मौके पर पहुंचे। इन्होंने बलराम की पत्नी रीता देवी को बुलाया। इसके बाद अभिलेखों की जांच की गई तो सरकारी रिकार्ड में जमीन बलराम की पाई गई।
सड़क अवैध पाई गई। इस पर ट्रैक्टर मंगाकर कच्चे रोड वाले हिस्से को समतल कराकर जुताने का प्रयास किया गया। इस पर तमाम ग्रामीण पहुंचे और रोड खत्म हो जाने पर आवागमन की समस्या की बात कहते हुए विरोध करने लगे। इस पर पुलिस ने लाठियां लटककर उन्हें खदेड़ दिया। जमीन जोतकर उसे खेत के तौर पर पुराना स्वरूप देकर पीड़ित परिवार के हवाले कर दिया गया। लेखपाल संतोष कुमार ने बताया कि खेत की जमीन पूरी हो जाने पर बलराम का परिवार अब संतुष्ट है। उसकी पत्नी ने ऐसा लिखकर भी दे दिया है।