मंगलपुर थाना क्षेत्र के गांव खानपुर रसूलाबाद निवासी बलराम शर्मा के 20 जुलाई को मुख्यमंत्री आवास के पास बेहोश हो जाने के बाद जिला प्रशासन ने अगले दिन आनन फानन में उसे जमीन पर कब्जा दिलाया था। कब्जा दिलाने के दौरान कुछ लोगों ने उसी वक्त विरोध जताया था, लेकिन तब मामले को गंभीरता से लेकर शांतिपूर्ण ढंग से समस्या का निर्विवाद हल नहीं कराया।
गौरतलब है कि बलराम शर्मा का खेत जहां पर था उसके कुछ हिस्से में करीब पांच वर्ष पहले सड़क बना दी गई थी। इस पर बलराम ने राजस्व विभाग के अधिकारियों को शिकायती पत्र दिए पर सुनवाई नहीं हुई। तब मजबूर होकर उसने न्याय के लिए लखनऊ का रुख किया था। लखनऊ में बेहोशी के बाद जब मामला अखबारों की सुर्खियां बना तो जिला प्रशासन जागा। तहसील के अधिकारियों ने जब मौके पर जाकर नाप-जोख कराई तो जिस जगह सड़क बनाई गई थी वहां बलराम का खेत निकला था। इसके बाद ट्रैक्टर से सड़क के उक्त हिस्से को जुतवाकर खेत में मिला दिया गया। इससे सड़क का आवागमन बंद हो गया था।
बीते दिनों जिलाधिकारी कुमार रविकांत सिंह ने सड़क पूर्ण कराकर आवागमन की समस्या का समाधान कराने की जिम्मेदारी अपर जिलाधिकारी प्रशासन शिवशंकर गुप्ता को सौंपी थी। इसके बाद यह मामला कागजी कार्यवाही में उलझा हुआ है। वहीं किसान के खेत में सड़क आखिर कैसे बनीं, सड़क का स्टीमेट बनाने के दौरान किन-किन इंजीनियरों ने लापरवाही बरती, यह जानने की जरूरत भी अब तक प्रशासन ने नहीं महसूस की है। ग्रामीणों की मानें तो सड़क पर आवागमन बंद होने के कारण भी तमाम ग्रामीण बलराम के विरोधी हो गए थे। हालांकि तब पुलिस बल ने लाठियां पटककर विरोध करने वालों को खदेड़ दिया था। ग्रामीणों का कहना है कि इस मामले में जांच कराकर उन अधिकारियों व अभियंताओं को दंडित करना चाहिए जिन्होंने मनमाने तरीके से किसान के खेत में रोड बनाकर विवाद को जन्म दिया।