शव देख रोती-बिलखती महिला को ले जाते परिजन।
अकबरपुर कोतवाली स्थित पोस्टमार्टम हाउस का नजारा स्तब्ध करने वाला था। कतार में रखी बर्फ की सिल्लियों पर शवों से लिपट कर कोई फूट-फूटकर रो रहा था तो कोई भगवान से शिकायत कर रहा था। वहीं शवों से भरे बैग के खुलने का इंतजार कर लोग अपनों का चेहरा देखने के लिए बेहाल थे।
बेरहम वक्त में उनके पास कोई ढांढस बंधाने वाला नहीं था। अर्थी को एंबुलेंस तक पहुंचाने के लिए चार कंधे भी नहीं थे। सोमवार को पोस्टमार्टम हाउस पर कई लोग अपनों के शव को घर तक ले जाने के लिए वाहन की खातिर अफसरों के सामने गिड़गिड़ाते हुए भी दिखाई दिए।
पोस्टमार्टम हाउस में कसबा रूरा के टिडंवा निवासी लल्लू प्रसाद का शव पोस्टमार्टम हाउस पहुंचते ही उनकी मां मीरा, पिता शिवाजी और बहन दहाड़े मारकर रो पड़ीं। बेटे का शव देखकर मां और बहन बेहोश हो गईं। वहां मौजूद लोगों की मदद से दोनों को परिसर के बाहर ले जाया गया। उधर कुछ लोग परिसर के सामने पड़े कपड़ों उलटते पलटते दिखाई दिए। जौनपुर निवासी रामजी पांडे ने बताया कि रेल हादसे के बाद से बेटी पूजा का पता नहीं चला। इस लिए वह कपड़ों को उलट-पलट रहे हैं। कोई काउंटर में रखे फोटो से अपने अजीज को पहचाने की कोशिश कर रहा था। यह सिलसिला देर रात तक जारी रहा।
आपाधापी के बीच पोस्टमार्टम हाउस परिसर के बाहर और भीतर वाहनों की कतार लगी थी। लाल-नीली बत्ती वाले वाहनों से सादे कपड़ों में उतरे पुलिस और प्रशासनिक अफसर व्यवस्था को संभालने में जुटे थे। एक तरफ जहां एंबुलेंस से शव उतारे जा रहे थे। वहीं, शवों के साथ परिजनों को रवाना करने के लिए वाहनों की खातिर हो हल्ला मचा था। बीच-बीच में राहत कार्य के लिए बुलाए गए पांच मजदूरों को आवाज लगाई जा रही थी। तभी महिला ने चिल्लाकर कहा कि ये यहां बैठकर मक्कारी कर रहे हैं। इसी बीच एक डॉक्टर ने माइक से एनाउंस किया कि 108 नंबर एंबुलेंस के ड्राइवर राजेश जहां कहीं भी हों, गाड़ी के पास पहुंच जाएं। उन्हें पटना के तारकेश्वर का शव लेकर जाना है।