जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक करती सीएमओ डा. अनीता सिंह।
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सीएमओ ने जिले में डेंगू के 87 मामलों में से 27 के सत्यापित होने की बात कही है। उन्होंने सभी चिकित्सा प्रभारियों को गांवों में टीम भेजकर रक्त पट्टिकाएं बनाने के साथ झोलाछापों के खिलाफ अभियान चलाने के निर्देश दिए।
सोमवार को जनपदीय स्वास्थ्य समिति की बैठक में मुख्य चिकित्साधिकारी डा. अनीता सिंह ने बताया कि शरीर में प्लेटलेटस की कमी आना डेंगू नहीं होता है। डेंगू का प्रमाणित टेस्ट एलाइसा है, जिसकी जांच प्रदेश के सिर्फ 27 संस्थानों में होती है। पैथालाजी केंद्र व झोलाछाप आमतौर पर रैपिड कार्ड टेस्ट से जांच कर भोले-भाले लोगों से रुपये ऐंठते हैं। रैपिड कार्ड टेस्ट से डेंगू की पुष्टि नहीं होती है।
उन्होंने बताया कि जिले में बुखार से प्रभावित अभी तक 183 गांवों में स्वास्थ्य टीमें गई हैं। सभी चिकित्सा प्रभारियों को मच्छरों पर रोकथाम के लिए डीडीटी का छिड़काव आदि कराने के निर्देश दिए हैं।
बैठक के दौरान कार्यवाहक सीएमएस (पुरुष) डा. पंकज श्रीवास्तव, महिला सीएमएस डा. अर्चना श्रीवास्तव, जिला कार्यक्रम अधिकारी राकेश यादव, डीपीआरओ अजय श्रीवास्तव, अपर सीएमओ डा. अशोक कुमार, डिप्टी सीएमओ डा. एपी वर्मा सहित स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी मौजूद रहे।
फीवर हेल्प डेस्क में दर्ज होगा बुखार पीड़ित का ब्योराॉ- कानपुर देहात। सीएमओ डा. अनीता सिंह ने सभी सीएचसी एवं पीएचसी प्रभारियों को निर्देश दिए है कि स्वास्थ्य केंद्र में फीवर हेल्प डेस्क में एक कर्मचारी को नियमित बैठाकर बुखार पीड़ित की पूरा विवरण दर्ज करें।
कार्य की दैनिक रिपोर्ट देनी होगी। कहा कि स्कूलों में स्वास्थ्य टीमों को भेजकर शिक्षकों व बच्चों को साफ-सफाई, मच्छरजनित रोगों से बचाव के प्रति जागरूक किया जाएगा।