इस्लामी शरीयत के अनुसार रमजान में रोजा चांद देखकर मनाने की रिवायत है। शिया व सुन्नी दोनों समुदाय के उलमा व अवाम इसे मानते हैं।
हालांकि इस बार आसमान में छाए बादलों के चलते रमजानुल मुबारक का चांद नजर आने पर संदेह है।
वहीं, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड के उपाध्यक्ष मौलाना डॉ. कल्बे सादिक पहले ही 11 जुलाई को रमजान का पहला रोजा रखे जाने का ऐलान कर चुके हैं।
पहला रोजा इसी गुरुवार को
इस्लामी शरीयत के मुताबिक इस्लामिक महीने 29 व 30 दिन के ही माने जाते हैं।
ऐसे में 29 शाबान यानी मंगलवार को चांद नहीं दिखा तो 30 का चांद मानते हुए गुरुवार से ही रमजान का महीना शुरू होगा और पहला रोजा रखा जाएगा।
'न उलझें चांद के विवाद में'
इसे लेकर शिया धर्मगुरु मौलाना डॉ. कल्बे सादिक ने शनिवार को ऐलान किया था कि चांद के विवाद में न उलझें, क्योंकि बादलों की वजह से चांद दिखना मुमकिन नहीं है।
इसके साथ ही खगोल शास्त्र के अनुसार भी चांद बुधवार को ही होना है। ऐसे में पहला रोजा 11 जुलाई को रखा जाएगा।
इस्लाम में नहीं होती 31 की तारीख
ईदगाह इमाम मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली का कहना है कि इस्लामी शरीयत है कि चांद देख कर रोजा रखें।
ऐसे में शाबान महीने की 29 को अगर चांद नहीं दिखा तो अगले दिन चांद मानने का हुक्म है, क्योंकि इस्लामिक महीनों में 31 की तारीख नहीं होती।