टूंडला। हथिनी कुंड बैराज से छोड़े गए पानी का असर अब यमुना में दिखाई देने लगा है। शुक्रवार को यमुना का जलस्तर करीब दो फीट और बढ़ गया। यमुना तटवर्ती क्षेत्र में खेती करने वाले किसानों की फसलों में पानी भर गया। बढ़ते जलस्तर को देखते हुए किसान निगरानी कर रहे हैं l शुक्रवार दोपहर जिलाधिकारी ने नगला सिंघी क्षेत्र के दो तटीय गांवों में पहुंचकर यमुना के बढ़ते जलस्तर को देखा। साथ ही अधीनस्थों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
यमुना तटवर्ती किसान शुक्रवार सुबह यमुना की तलहटी के खेतों की ओर पहुंचे तो पानी देख रंग रह गए। यमुना किनारे की बाजरा मक्का ज्वार व सब्जियों की फसलें जलमग्न थीं। रसूलाबाद निवासी हरेलाल, रामेश्वर दयाल, सोलीराम की सब्जी की फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गई हैं। किसानों का कहना है इसी फसल के सहारे उनके परिवार का भरण पोषण होता था, अब कहां से खर्चा चलेगा। हजारों रुपये खर्च कर फसल तैयार की थी।
यही हाल बजहेरा निवासी रामखिलाड़ी, सरमन सिंह का है। किसान पानी से बर्बाद हुई फसल को देख परेशान दिखाई दिए। यमुना में तेजी से बढ़ते जलस्तर को देख शुक्रवार दोपहर दो बजे डीएम डॉ. उज्जवल कुमार गांव नियामतपुर स्थित यमुना घाट पहुंचे। जहां ग्रामीणों और अधिकारियों से वार्ता करने के बाद धीरपुरा पहुंचे। जहां यमुना के जल स्तर को लेकर उन्होंने बताया कि विगत तीन दिन के अंदर यमुना में पानी तेजी से बढ़ा है और अभी भी बढ़ रहा है। ऐसे में एसडीएम, तहसीलदार, कानूनगो, लेखपाल, पुलिस, पशु और स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों को देखरेख में लगाया गया है।
उन्होंने सभी को निर्देशित किया है कि क्षेत्र की हर गतिविधि पर नजर बनाकर रखें और ग्रामीणों को जागरूक करते रहें। जलस्तर जब गांव के करीब पहुंचने की स्थिति में हो तो ग्रामीणों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाएं। उन्होंने बताया कि फिलहाल जलस्तर गांव से काफी दूर है। इस मौके पर एसडीएम सत्येंद्र सिंह भी उपस्थित रहे।
इन गांवों के किसानों की फसलें हुई प्रभावित
पानी से रुधऊ मुस्तकिल, नगला केसों, अनवारा, जटपुरा, रसूलाबाद,बालमपुर बजहेरा,ठार रामगढ़, नगला काले, कुतकपुर साहब, ग्वारई, नगला राजपति, नगला गाढ़े, नियामतपुर व ठार डेका समेत करीब दो दर्जन गांव के ग्रामीण प्रभावित हुए हैं।
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