फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

यूपी बोर्ड : जहां हैं प्रयोगशालाएं, वहां भी नहीं हो रहे प्रैक्टिकल

Wed, 06 Dec 2023 11:36 PM IST
आगरा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
विज्ञापन
विज्ञापन
फिरोजाबाद। जिले के अधिकांश स्कूलों में प्रयोगशालाएं नहीं हैं। इससे राजकीय स्कूल भी पिछड़े हैं, लेकिन जहां प्रयोशालाएं बनीं हैं, वहां भी प्रैक्टिकल नहीं कराए जा रहे हैं। क्यों कि बीते एक दशक में महंगाई चार गुना बढ़ गई, लेकिन माध्यमिक विद्यालयों व राजकीय विद्यालयों में विज्ञान शुल्क में 13 वर्षों से बढ़ोतरी नहीं हुई है। शुल्क में बढ़ोतरी न होने से विद्यालयों की प्रयोगशालाएं सिर्फ दिखावटी बनकर रह गई हैं। छात्र-छात्राएं प्रयोगिक विषयों का भी सिर्फ कागजी ज्ञान मिल रहा है। इंटर में होने वाले प्रयोगात्मक कार्यों पर असर पड़ रहा है।जनपद में 59 अशासकीय सहायता प्राप्त व 22 राजकीय विद्यालय व शेष 430 वित्तविहीन विद्यालय संचालित हो रहे हैं। कुछ स्कूलों को छोड़ दें तो अधिकांश प्राइवेट स्कूलों में प्रयोगशालाएं नहीं हैं। यही हाल राजकीय विद्यालयों का है। अशासकीय विद्यालयों में प्रयोगशालाएं हैं। इन विद्यालयों में विज्ञान शुल्क 65 रुपये प्रति छात्र प्रति वर्ष लिया जाता है। इस विज्ञान फीस को 15 जनवरी 2010 से लागू किया गया है। भूगोल विषय में भी 60 रुपया प्रति छात्र प्रति वर्ष लिया जाता है। जबकि 13 सालों में हर चीज में मंगाई बढ़ गई है।
विज्ञापन

शिक्षकों का कहना है कि सामानों के मूल्यों में बढ़ोतरी होने से दिक्कत आ रही है। इन विद्यालयों को प्रयोगशाला के सामान खरीदने में शासन से कोई सहायता प्राप्त नही होती है। शासन से निर्धारित शुल्क के कम होने के कारण प्रयोगशाला के प्रयोग में परेशानी हो रही है। विद्यालय से जुड़े लोगों का कहना है कि शुल्क कम होने के कारण प्रतिवर्ष प्रयोगशाला के सामान खरीदने में दिक्कत हो रही है। जबकि हर साल 30 अंक प्रगोगिक परीक्षा के निर्धारित है।


-13 साल में विज्ञान शुल्क में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है और न ही कोई बजट जारी होता है। इंटर की परीक्षाओं के बाद ही छात्र-छात्राएं मेडिकल व इंजीनियरिंग की तैयारी करते हैं। कम शुल्क में अच्छा प्रयोग कैसे हो पाएगा।-पंकज भारद्वाज, विज्ञान शिक्षक
विज्ञापन


तिलक इंटर कॉलेज

-प्रयोगिक परीक्षा का कोई बजट नहीं होता, जबकि फीस भी बहुत कम है। जबकि केमिकल से लेकर उपकरण बहुत ज्यादा महंगे है। छात्रों से प्रयोग कराए जाते हैं, लेकिन यह स्कूलों के लिए यह बहुत मुश्किल होता है।
उमेश यादव, प्रधानाचार्य राष्ट्रीय श्रमिक विद्यालय

-
प्रयोगशाला में इनकी कीमतें बढ़ी हैं
-स्प्रिट, सलफ्यूरिक एसिड, अमोनियम क्लोराइड, अमोनिया नाइटेट, नाइटिक एसिंड, जिंक डस्ट, इथिल अल्कोहल, टेस्ट ट्यूब, सूक्ष्मदर्शी, मोनो काट स्टेम, डाइकार स्टेम, माइक्रोस्कोप, स्लाइड, ग्लिसरीन, वर्नियर कैलीपर्स, विरल घड़ी, वोल्ट मीटर, चल सूक्ष्म दर्शी, प्लेन टेबुल, सर्वेक्षण जंजीर, साहुल, चिमटा आदि।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें