फिरोजाबाद। पानी को साफ करने के लिए स्थापित ट्रीटमेंट प्लांट यमुना के लिए श्राप बन गए हैं। ट्रीटमेंट प्लांटसे निकलने वाले पानी से यमुना नदी में धूल व मिट्टी के कणों की मात्रा बढ़ गई है। सोफीपुर स्थित एसटीपी (सीवर ट्रीटमेंट प्लांट) की रिपोर्ट में यह तथ्य प्रकाश में आया है। रिपोर्ट के मुताबिक यमुना के पानी में घुलनशील बीओडी (बायलोजिकल आक्सीजन डिमांड) का स्तर संतोषजनक है। जबकि फीकल स्लग (पानी में मिट्टी और धूल की मात्रा) ज्यादा है। जबकि कैमिकल जांच के लिए कोई इंतजाम नहीं है।
अमर उजाला ने दो दिन पूर्व यमुना नदी की धारा में झाग उत्पन्न होने की खबर प्रकाशित की थी। रविवार को नगर निगम ने यमुना में छोडे़ जा रहे सीवर ट्रीटमेंट प्लांट द्वारा शोधित पानी की रिपोर्ट जारी की। रिपोर्ट के अनुसार यमुना में छोड़े जा रहे पानी में बीओडी यानि पानी में ऑक्सीजन लेबल सामान्य स्थिति में 8.5 मिलीग्राम है। जबकि एक लीटर पानी में बीओडी की मात्रा 10 मिलीग्राम होनी चाहिए। ट्रीटमेंट प्लांट में शोधित पानी में फीकल स्लग की मात्रा प्रति एक लीटर में 230 होनी चाहिए, जबकि प्रति एक लीटर में 214 माइक्रो मिलीग्राम है। इसी तरह पानी में पीएच यानि हाइड्रोजन की मात्रा सामान्य स्थिति एक लीटर पानी में 8.5 है जबकि मानक के अनुसार यह 7.5 मिलीग्राम होनी चाहिए।
ट्रीटमेंट प्लांट द्वारा शोधित पानी में मिट्टी के कणों की मात्रा अधिकतम स्तर पर है। हालांकि स्थिति सामान्य है। यमुना नदी में छोड़े जा रहे ट्रीटमेंट प्लांट के पानी की लगातार जांच कराई जा रही है। - तारकेश्वर पांडेय, एक्सईन व प्रभारी एसटीपी