अपने वृद्ध दादा-दादी को पालकी रूपी कांवड़ में बैठकर जलाभिषेक के लिए लेकर जाते पोते, साथ में सुर
- फोटो : अपने वृद्ध दादा-दादी को पालकी रूपी कांवड़ में बैठकर जलाभिषेक के लिए लेकर जाते पोते, साथ में सुरक्षा के लिए मौजूद एसपी सिटी व रजावली इंस्पेक्टर। संवाद
पचोखरा (फिरोजाबाद)। सावन मास की कांवड़ यात्रा के दौरान आगरा के गांव निवरी धीमश्री में पारिवारिक संस्कारों की अनूठी मिसाल देखने को मिली है। यहां रहने वाले 90 वर्षीय बुजुर्ग श्यामलाल और उनकी 85 वर्षीय पत्नी अंगूरी देवी की अत्यधिक वृद्धावस्था के कारण पैदल चलने में असमर्थ होने के बावजूद सावन में शिव जलाभिषेक की तीव्र इच्छा थी। इस आकांशा को पूरा करने के लिए उनके सात पोतों अभिषेक, दीपक, सुरेश, चिंटू व अन्य भाइयों ने उन्हें फूल-मालाओं से सजी पालकी रूपी कांवड़ में बैठाकर अपने कंधों पर यात्रा कराने का संकल्प लिया। यह जत्था सोरों स्थित लहरा घाट से पवित्र गंगाजल लेकर अपने गांव के शिव मंदिर के लिए रवाना हुआ। मार्ग में जहां से भी यह अनोखी पालकी गुजरी, वहां श्रद्धालुओं और राहगीरों ने रुककर बुजुर्ग दंपती के दर्शन किए और पोतों के इस सेवाभाव की प्रशंसा करते हुए उन्हें कलयुग के श्रवण कुमार की संज्ञा दी। शनिवार रात जब यह अनोखी कांवड़ रजावली चौराहा पहुंची, तो एसपी सिटी रवि शंकर प्रसाद और थानेदार ने फूल-मालाओं से उनका स्वागत किया। संवाद