जनपदीय साहित्यिक मंच के तत्वावधान में गंगा जमुनी काव्य संध्या का आयोजन किया गया।
मोहल्ला चौबान स्थित चौबे कमलापति की धर्मशाला के प्रांगण में आयोजित काव्य संध्या का शुभारंभ मां शारदे के तैल चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलित करके पूर्व जिला शासकीय अधिवक्ता अरविंद चतुर्वेदी ने किया। इस दौरान सूफी जमाल अफगानी ने कहा ‘फिर ऐ जमील कौन सुनेगा तेरी गजल, दुनियां से उठते जाते हैं इस इत्मों फन के लोग। अनवर कमाल अनवर ने पढ़ा ‘ऐसे लोगों की नहीं कोई जरूरत घर को, घर में रहते हुए जो घर के ही नहीं हो सकते।’ पंडित रामसनेहीलाल शर्मा ‘यायावर’ ने कहा ‘आली वृंदावन चलें जहां बसें रसराज, पीछे-पीछे ही आएगा बौराया ऋतुराज।’ रघुवीर सिंह ने कहा ‘आज बसंती पहन चुनरिया सृष्टि लगी है झूमने, व्याकुल भंवर फिरें रसवंती कलियों का मुख चूमने।’ वहीं मुन्ना शम्श, प्रमोद बाबू दुबे, हरीश चतुर्वेदी, नसीम अनवर तरकश, शफीक राही, जहबीरउद्दीन, हबीब अहमद, हाजी उस्मान, भोलानाथ ने भी काव्यपाठ किया। इस दौरान प्रकाशचंद्र चतुर्वेदी, लियाकत अली, दिलीप चतुर्वेदी, इकबाल शम्शी आदि मौजूद रहे।