फिरोजाबाद लोकसभा सीट जिसे समाजवादी पार्टी का गढ़ भी माना जाता है। यहां की जनता के रुख की बात करें तो नए चेहरों पर बटन दबाती है। पिछले चुनावों के आंकड़े देखें तो ये आप पूरी कहानी समझ जाएंगे...
फिरोजाबाद लोकसभा सीट पर किसी भी दल के लिए जीत की राह आसान नहीं है। यहां के मतदाता पिछले कई चुनाव से काफी जागरूक हुए हैं। पार्टी बंदी में वोट जरूर करते हैं, लेकिन नए चेहरे पर दांव खेलने में विश्वास जताते हैं। पिछले कई चुनाव के परिणाम इसकी कहानी बयां कर रहे हैं। पिछले चार लोकसभा चुनाव पर नजर डाले तो हर चुनाव में मतदाताओं ने नए प्रत्याशी को ही चुनकर लोकसभा भेजा है।
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फिरोजाबाद लोकसभा सीट पर पिछले कई चुनाव से दो पार्टी के बीच ही उठापटक का खेल चल रहा है। वर्ष 2019 की बात करें तो भाजपा ने सपा की अंदरुनी लड़ाई का फायदा उठाते हुए यहां से चंद्रसेन जादौन को प्रत्याशी बनाया। आमजनों में चर्चा थी कि भाजपा का प्रत्याशी चाचा शिवपाल की रजामंदी से भाजपा ने उतारा था। इससे चाचा शिवपाल की दिल्ली की राह आसान हो सके, लेकिन गृहमंत्री अमित शाह ने अपना बयान दिया कि हमारा प्रत्याशी डमी नहीं है। इसके बाद फिरोजाबाद की जनता ने लड़ाई से बाहर दिख रही भाजपा पर अपना प्यार लुटाया। चंद्रसेन जादौन ने अक्षय यादव को शिकस्त दी।
इसी तरह वर्ष 2014 में भाजपा से एसपी सिंह बघेल चुनाव में उतरे, लेकिन फिरोजाबाद की जनता ने सैफई परिवार के चेहरे नए चेहरे अक्षय यादव को चुनकर लोकसभा भेजा। हालांकि इस चुनाव में सपा पर बूथ कैप्चरिंग जैसे आरोप भी लगे। एसपी सिंह बघेल ने इस आरोप को लेकर शाम को जैन मंदिर चौराहे पर धरने पर बैठे, तो पुलिस ने उन पर जमकर लाठियां भी बरसाईं।
वर्ष 2009 में लोकसभा चुनाव में फिरोजाबाद की जनता ने सैफई परिवार के चेहरे को वरीयता दी। यहां से पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव मैदान में उतरे। इस बार उनकी चुनावी लड़ाई उस समय बसपा नेता एसपी सिंह बघेल से हुई। इस चुनाव में जनता ने नए चेहरे के रूप में अखिलेश यादव को जिताया। हालांकि बाद में अखिलेश यादव ने यहां से इस्तीफा देकर अपनी पत्नी डिंपल यादव को चुनाव मैदान में उतारा। इस चुनाव में एक बड़ी उठापटक फिर देखने को मिली। कांग्रेस ने यहां से सिनेस्टार राजबब्बर को डिंपल के मुकाबले उतारा। राजबब्बर ने यहां से बड़ी जीत दर्ज की।