फिरोजाबाद। कुछ तो मजबूरी रही होंगी उस मां की, जो नौ माह कोख में रखकर जन्म के तुरंत बाद बेटी को चौराहे पर पड़ी छोड़ गई। जिस बिटिया को मां का दुलार नहीं मिला, वो अब अभागी नहीं रही। बल्कि वह आज लाडली परी बन गई है। परी के आने से सौ शैय्या अस्पताल का माहौल खुशनुमा बन गया है। अस्पताल का स्टाफ कोई पालना लेकर आ रहा है तो कोई कपडे़, खिलौने। परी के अस्पताल में आने की खबर से उसे गोद लेने के लिए शहर के अच्छे-अच्छे परिवार का आ रहे हैं। छह अक्तूबर को दोपहर के समय नवजात कन्या मीरा चौराहे पर सड़क किनारे एक कपडे़ में लावारिस हालत में पड़ी हुई थी। किसी अंजान व्यक्ति ने डायल 112 पुलिस को फोन कर सूचना दी। पुलिस मौके पर पहुंची ने कपडे़ को खोलकर देखा तो उसमें हाल की ही जन्मी बिटिया थी। डायल 112 पुलिस बेटी को सड़क किनारे से उठाकर सौ शैय्या अस्पताल ले आई। जहां बालिका को एसएनसीयू में भर्ती कर लिया। बिटिया के आने के बाद अस्पताल का माहौल खुशनुमा हो गया है और उसे लाड़ दुलार मिल रहा है। स्टाफ ने मिलकर उसका नाम प्यार से परी रख दिया है। परी इस समय अस्पताल की लाडली बिटिया हो गई है। पैरामेडिकल स्टाफ उसकी देखभाल कर रहा है। कोई पालना ला रहा है तो कोई दर्जनों खिलौने ला रहा है। सात दिन में परी ने आठ जोड़ी नए-नए कपडे़ बदल लिए हैं। कोई बदलकर कपड़ा नहीं पहनाया है। अस्पताल का स्टाफ ड्यूटी शुरु और खत्म करने पर परी से मिलने जरूर आ रहा है। यहां तक कि जो चिकित्सक एक बार ही अस्पताल का राउंड लेने आते थे, वह परी की वजह से दो-दो बार एसएनसीयू में आ रहे हैं। शहर के कई उद्यमी परिवार भी बिटिया को गोद लेने के लिए आ रहे हैं। 30 से ज्यादा दंपती बिटिया को गोद लेने की इच्छा जाहिर कर चुके हैं। हालांकि गोद लेने की प्रक्रिया का नियम अलग होने के कारण परी को गोद नहीं दिया जा सका है।
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शिशु गृह भेजी जाएगी परी
एक मां ने ठुकराया तो 30 से ज्यादा यशोदा अभी तक परी को गोद लेने के लिए आगे आ चुकी हैं। हालांकि नियम आडे़ आ रहे हैं। इसलिए लाडली को शिशु गृह भेजा जाएगा। वैसे तो सभी को एसएनसीयू में परी खूब पसंद आ रही है, मगर स्वास्थ्य की दृष्टि से चिकित्सक ने उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा है कि परी अब स्वस्थ है। उसे लंबे समय तक बीमार बच्चों के साथ रखना उचित नहीं।