टूंडला। शहर की सरकार चुने हुए डेढ़ माह से अधिक समय हो गया, लेकिन शहर के हालातों को कोई तब्दीली नहीं आई है। हालात पहले से भी बदतर होते जा रहे हैं। जगह-जगह गंदगी के ढेर लगे रहते हैं, जिन पर निराश्रित गोवंश व अन्य जानवर विचरण करते रहते हैं। नाले-नालियों की समुचित सफाई नहीं हुई है, जिससे जरा सी बारिश में ही उफन रहे हैं। पानी, प्रकाश की समस्या बनी हुई है।
15 मई को हुई मतगणना के साथ ही निर्दलीय भंवर सिंह पालिकाध्यक्ष चुन लिए गए थे। 27 मई को शपथ ग्रहण होने के साथ ही शहर नई सरकार भी स्थापित हो गई। चुनाव से पूर्व भंवर सिंह ने शहर की जनता को तमाम सब्जबाग दिखाए। चुनाव जीतने के साथ ही शहर की दशा व दिशा बदलने के वादे किए। सफाई, पानी, प्रकाश व्यवस्था को तत्काल सुधारने एवं अन्य बड़ी योजनाओं को बोर्ड मीटिंग के बाद करने के वादे किए। शहर की सरकार को सत्तासीन हुए एक माह से अधिक गुजर गया, बोर्ड की बैठक भी हो गई, लेकिन शहर के हालात नहीं बदले हैं। इसको लेकर शहर के लोग स्वयं को ठगा सा महसूस कर रहे हैं।
आलम यह है कि मुख्य वीआईपी रोड पर सुबह 10 बजे तक गंदगी के ढेर लगे रहते हैं। सड़कों पर सफाई सुबह सात बजे से पहले शुरू नहीं होती। वहीं गंदगी के ढेरों पर निराश्रित गोवंश व अन्य आवारा जानवर विचरण करते रहते हैं। शहर के शिवपुरी, न्यू शिवनगर, राधानगर आदि मोहल्लों में व शहर के सार्वजनिक स्थलों पर पेयजल व्यवस्था अभी नहीं सुधरी है। कच्चा टूंडला, न्यू शिवनगर के कई क्षेत्रों में समुचित प्रकाश व्यवस्था नहीं है।
शहर में किसी भी दृष्टिकोण से ऐसा नहीं लग रहा, जिससे ऐसा प्रतीत हो कि शहर की सरकार बदल गई है। इससे अच्छी व्यवस्था तो प्रशासन के हाथ में पालिका की बागडोर थी, तब थी।
राजकिशोर पाठक, समाजसेवी
शहर की सफाई व्यवस्था व निराश्रित गोवंशों पर नए पालिकाध्यक्ष ने कुछ नहीं किया। सुबह के हालात बहुत खराब रहते हैं। दुकानें खुलने तक कूड़ा पड़ा रहता है। कूड़ों में आग लगा दी जाती है।
नरेंद्र कटियार, व्यवसाई
सफाई व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सफाईकर्मियों की कमी के चलते थोड़ी समस्या है। जहां भी पेयजल, सफाई, प्रकाश की समस्या है, उसे तत्काल दूर किया जाएगा। अगले दो माह में शहर के हालात बदल दिए जाएंगे।
भंवर सिंह, पालिकाध्यक्ष, टूंडला