फिरोजाबाद। थाना दक्षिण क्षेत्र में 12 दिन बाद फैक्टरी खुली तो श्रमिक मजदूरी का हिसाब कराने के लिए पहुंच गया। जहां अचानक उसकी हालत बिगड़ गई। उसे आनन-फानन में सरकारी ट्रामा सेंटर ले जाया गया। जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। परिजन ने फैक्टरी में श्रमिक का शव रखकर चार घंटे तक हंगामा किया। श्रमिक नेता और पुलिस के पहुंच जाने के बाद उनका आपस में समझौता हो गया। थाना लाइनपार के नगला विश्नु निवासी सत्यप्रकाश (57) शहर के स्टेशन रोड स्थित एक ग्लास फैक्टरी में अपने बेटे रवि के साथ काम करते थे। पुलिस के मुताबिक फैक्टरी पिछले 12 दिन से बंद थी। तो सत्यप्रकाश शनिवार को अपनी मजदूरी का हिसाब कराने के लिए फैक्टरी गए थे। साथ ही उन्हें अपने बेटे रवि को खाना भी देना था। फैक्टरी में हिसाब कराने के दौरान ही उनकी हालत बिगड़ गई। उसका बेटा साथी मजदूरों के साथ सत्यप्रकाश को लेकर सरकारी ट्रामा सेंटर पहुंच गए। जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इसके बाद परिजन शव को लेकर वापस फैक्टरी पहुंच गए और हंगामा काटना शुरू कर दिया।
मामले की जानकारी पर श्रमिक नेता व पुलिस मौके पर पहुंच गई। सभी से हंगामा कर रहे परिजन को समझाने का प्रयास किया, लेकिन वह मुआवजे की मांग कर रहे थे। चार घंटे तक हंगामा काटने के बाद फैक्टरी मालिक ने परिजन की बात मान ली। शाम पांच बजे मुआवजे की धनराशि मिलने के बाद शव को फैक्टरी से हटाया गया। थाना प्रभारी योगेंद्रपाल सिंह ने बताया कि मृतक के परिजन और फैक्टरी मालिकान के बीच पांच लाख रुपये में फैसला हुआ है। मामले में कोई भी तहरीर प्राप्त नहीं हुई है।