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Firozabad News: अब नहीं सुनाई देते फाग और होली के गीत

Sat, 04 Mar 2023 07:00 PM IST
आगरा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
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अब नहीं सुनाई देते फाग और होली के गीत
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बदले जमाने के साथ बदल गईं परंपराएं, पहले एक माह तक चलता था गायन, निकलती थीं टोलियां
संवाद न्यूज एजेंसी
फिरोजाबाद। रंगों के त्योहार होली की परंपराएं बदले समय के साथ काफी बदल गईं। शहर से लेकर गांवों में अब पहले जैसा उत्साह दिखाई नहीं देता। गांवों में भी अब होली के गीत और फाग सुनाई नहीं देते हैं।
होली खेलने का क्रम यूं तो फाल्गुन मास शुरू होते ही प्रारंभ हो जाता था। शादी विवाह में जाने वाले लोगों को ग्रामीण खूब रंगा करते थे। कोई बुरा भी नहीं मानता था। बराती भी पहले से ही तैयारी करके जाते थे कि फाल्गुन मास आ गया तो बरात में रंग तो खेला ही जाएगा। लेकिन अब ऐसा नहीं होता है। युवाओं की टोलियां गांवों में होली को बढ़ाने के लिए शाम को निकलती थीं और देररात्रि तक होली के लिए लकड़ी एकत्रित करके पहुंचाने का काम करती थी। लेकिन अब न तो बाग बगीचा बचे और न ही पहले जैसी टोलियां। फाग तो पंद्रह दिन पहले शुरू हो जाता था और 15 दिन बाद नवरात्रि तक गांवों में फाग (होली गायन) चला करता था। बुजुर्गों की मानें तो एक दूसरे गांवों तक में गाने जाते थे। लेकिन अब गांव में फाग गाने वाली लोग ही नहीं बचे हैं।
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- जरारी यादव निवासी 95 वर्षीय ग्याप्रसाद बोले कि रंगों के त्योहार होली का न तो पहले जैसा उत्साह रहा और न वैसा होली गायन। पहले तो हम लोग फाल्गुन मास शुरू होते ही फाग गायन शुरू कर देते थे और नवरात्रि तक चलता था। एक दूसरे गांव में होली मिलने के लिए जाते थे। फाग गायन के दौरान पूरी टीम एकत्रित होती थी। अब ऐसा नहीं है।


- नगला मान सिंह निवासी कमलेश कुमार कहते हैं कि होलिकोत्सव का उत्साह अब खत्म हो गया। पहले लोगों के पास समय हुआ करता था, होली गायन के साथ-साथ एक दूसरे से मिलते थे। लेकिन वर्तमान में यह परंपराएं खत्म होती जा रहीं हैं। परंपरागत गायन से युवाओं के दूर होना चिंता का विषय है।
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- नगला रमियां निवासी जनक सिंह बोले कि होलिकोत्सव के नाम पर सिर्फ औपचारिता पूरी होने लगी है। हकीकत में पहले जैसा उत्साह,रंग डालने की परंपरा नहीं रही। आज किसी पर रंग डाल दो तो वहां विरोध करने लगते हैं। विवाद की स्थिति बन जाती है। लेकिन पहले ऐसा नहीं है।
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