फिरोजाबाद में कोर्ट ने नाबालिग से दुष्कर्म करने के दोषी को सात वर्ष कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही दस हजार का अर्थदंड लगाया है। कोर्ट ने कहा कि अर्थदंड की आधी धनराशि पीड़िता को दी जाएगी। साथ ही यह भी कहा कि नाबालिग होने के चलते पीड़िता का बयान कि वह अपनी मर्जी से गई थी, कोई मायने नहीं रखता।
उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद में अपर जिला जज एवं विशेष जज पॉक्सो न्यायालय प्रथम अवधेश कुमार सिंह ने नौ वर्ष पहले नाबालिग को भगाकर ले जाने के बाद दुष्कर्म करने के दोषी को सात वर्ष कारावास की सजा सुनाई है। दस हजार का अर्थदंड लगाया है। अर्थदंड अदा न करने पर साढे तीन माह का अतिरिक्त कारावास भोगना होगा। अर्थदंड की आधी धनराशि पीड़िता को दी जाएगी।
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मामला थाना उत्तर क्षेत्र का है। 17 साल की पीड़िता अपने चाचा के घर गई थी। अगले दिन रिजल्ट की जानकारी करने ही बात कहकर सुबह नौ बजे घर से निकली परंतु वापस नहीं लौटी। काफी तलाश करने के बाद किशोरी नहीं मिली। थाना मक्खनपुर के गलामई निवासी पुष्पेंद्र बाइक पर बैठाकर ले जा रहा था।
पुलिस ने दोनों के खिलाफ दाखिल किया आरोप पत्र
इस पर पीड़िता की मां एवं बहन ने बैठकर जाता देख शोर मचाया तो उसे छोड़कर भाग गया। इससे विश्वास था कि वह उसे ले गया है। थाने में पुष्पेंद्र एवं राजेंद्र उर्फ शैलेंद्र पर खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने दोनों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया। मामला अपर जिला जज एवं विशेष जज पॉक्सो एक्ट प्रथम अवधेश कुमार सिंह के न्यायालय में पहुंचा।
शासन की ओर से पैरवी विशेष लोक अभियोजक अवधेश भारद्वाज ने करते हुए केस को साबित करने को उच्च न्यायालय एवं सर्वोच्च न्यायालय की कई नजीरें पेश की। न्यायाधीश अवधेश कुमार सिंह ने अभिलेखों पर उपलब्ध साक्ष्य एवं गवाहों के बयान के आधार पर दोषी पुष्पेंद्र को सजा सुनाई है। आरोपी राजेश उर्फ शैलेंद्र को साक्ष्य के अभाव में संदेह का लाभ देते हुए दोष मुक्त किया।
नाबालिग की सहमति पर न्यायालय ने यह कहा
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश-अतिरिक्त विशेष न्यायाधीश, पॉक्सो अधिनियम प्रथम अवधेश कुमार सिंह ने कहा कि पीड़िता घटना के समय नाबालिग थी। पीड़िता का न्यायालय में अपनी मर्जी से आरोपी के साथ जाने वाला बयान कोई महत्व नहीं रखता है। क्योंकि पीड़िता उस समय अपना भला बुरा समझने में सक्षम नहीं थी।
आरोपी ने बहला फुसला कर बनाए शारीरिक संबंध
कहा कि यदि वह अपना भला बुरा समझती तो आरोपी के साथ नहीं जाती। वह उसके साथ शारीरिक संबंध नहीं बनाती। आरोपी उसे न केवल बहला फुसला कर ले गया बल्कि उसने शारीरिक संबंध बनाए। इस कारण से वह शादी से पूर्व ही गर्भवती हो गई थी। 18 वर्ष से कम आयु में यदि अनैतिक संबंध बनाए जाते हैं तो ऐसी दशा में सहमति का कोई अर्थ नहीं रह जाता। क्योंकि, पीड़िता घटना के समय नाबालिग थी।