फिरोजाबाद। महात्मा गांधी पीजी कॉलेज में राष्ट्रीय संगोष्ठी के दूसरे दिन रविवार को आए विद्वानों ने गुरमति साहित्य पर शोध पत्र पढ़े। साहित्यकारों ने गुरमति साहित्य का महत्व बताया। संत एवं कवियों के योगदान की चर्चा की और साहित्य में छिपे हुए संदेश को समझाया।
दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के अंतिम दिवस सत्र की अध्यक्षता कर रहे डॉ. श्याम सनेही लाल शर्मा ने गुरमति साहित्य एवं यूपी के संत-कवियों से जुड़े हुए पक्षों पर प्रकाश डाला। प्रथम सत्र में शोध वाचन पत्र सत्र में कृष्ण कुमार कनक और सतीश ने गुरमति साहित्य एवं इसमें संत भीकम के योगदान पर शोध पत्र पढ़ा। संचालन डॉ. प्रिया सिंह ने किया। समापन सत्र में प्राचार्या डॉ. अंजु शर्मा ने कार्यक्रम पर प्रकाश डाला। समन्वयक अरविंद नारायण मिश्र ने कहा पंजाबी साहित्य को अन्य भाषा एवं विषयों से जोड़ कर अन्वेषण करने पर ही इसकी व्यापकता को बल मिलेगा।
डॉ.रामसनेही लाल शर्मा यायावर ने कहा गुरु शिष्य परंपरा में जो सिद्धांत है, उनके देवत्व तत्वों को समझकर स्वस्थ समाज की स्थापना की तरफ अग्रसर होना होगा। वृंदावन शोध संस्थान के निदेशक डॉ. राजीव द्विवेदी ने संपूर्ण सहयोग का आश्वास दिया। समापन सत्र का संचालन डॉ.एकता ने किया। कॉलेज सचिव सतीश चंद्र गुप्ता, पूर्व सचिव अनिल उपाध्याय, एसआरके इंटर कॉलेज प्रधानाचार्य डॉ.डीपीएस राठौर मंचासीन रहे। संयोजिका डॉ.संध्या द्विवेदी ने भी साहित्य में संत एवं कवियों की भूमिका पर प्रकाश डाला। आभार डॉ. प्रियदर्शिनी उपाध्याय ने जताया। महिला शिक्षक संघ से रीमा यादव, डॉ. प्रिया, शबनम, निशा, ममता, अरुणा, अनिल, उपेंद्र भी उपस्थित रहे।