उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की सरगर्मियां तेज हो गई हैं। इसी चुनावी माहौल के बीच अमर उजाला की टीम 'सत्ता का संग्राम' अभियान के तहत फिरोजाबाद जिले की जसराना विधानसभा क्षेत्र पहुंची। टीम ने किसानों, युवाओं और स्थानीय लोगों से आगामी चुनाव के मुद्दों तथा विकास पर खुलकर चर्चा की।
जसराना में विधायक के काम पर क्या बोली जनता
जसराना विधानसभा क्षेत्र के लोगों से बात की। स्थानीय लोगों ने आगामी चुनाव के लिए अपने प्रमुख मुद्दे बताए। उन्होंने महंगाई, बेरोजगारी और खराब बुनियादी ढांचे पर चिंता व्यक्त की। विजेंद्र ने आवारा पशुओं से फसलों को नुकसान और सड़क दुर्घटनाओं की समस्या बताई। स्थानीय लोगों के अनुसार, जसराना में सड़कों की स्थिति ठीक करने की बात कही। रिजवान कुरैशी ने जसराना बाईपास और बाजार में लगने वाले जाम को एक बड़ा मुद्दा बताया। लोगों ने बताया कि आवारा पशुओं के कारण किसानों को रातभर खेतों की रखवाली करनी पड़ती है। एक स्थानीय नागरिक ने बताया कि विधायक ने फायर स्टेशन के लिए चार बार विधानसभा में प्रस्ताव रखा।
जसराना में क्या हैं प्रमुख चुनावी मुद्दे?
जसराना विधानसभा में स्थानीय निवासियों ने आगामी चुनाव के लिए अपने प्रमुख मुद्दे बताए। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बुनियादी ढांचे पर चिंता व्यक्त की।अनिल जरी ने शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार में समानता को आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि सुरक्षा में सुधार हुआ है, लेकिन अन्य क्षेत्रों में काम बाकी है। सरकारी परियोजनाओं में धन के उपयोग पर समीक्षा की आवश्यकता है। विपिन जौरी ने बेरोजगारी और महंगाई को मुख्य मुद्दे बताया। उन्होंने कहा कि सड़कें बनी हैं, लेकिन मंदिर में काम सरकार द्वारा हुआ।शमशाद अली ने वित्त विहीन शिक्षकों की अनदेखी, महंगाई और बेरोजगारी का जिक्र किया। कुलदीप सक्सेना ने चुनावों में जाति आधारित मतदान को प्रमुख मुद्दा बताया। उन्होंने जसराना सीएससी पर स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी और युवाओं के भविष्य की चिंता व्यक्त की।
सुरक्षा और विकास के मुद्दों पर खुलकर बोले किसान
'सत्ता का संग्राम' कार्यक्रम में जसराना विधानसभा क्षेत्र के ग्रामीण मतदाताओं और किसानों से बात की। उन्होंने आगामी चुनाव के लिए अपने प्रमुख मुद्दों और विधायक के कामकाज पर विचार साझा किए। कुछ लोगों ने सरकार के कार्यों की सराहना की, जबकि अन्य ने कई समस्याओं पर चिंता व्यक्त की। भूपेंद्र सिंह जैसे कुछ मतदाताओं ने योगी सरकार के अच्छे कामों की प्रशंसा की। उन्होंने गुंडागर्दी खत्म होने और मां-बहनों की सुरक्षा में सुधार को मुख्य उपलब्धि बताया। ओम प्रकाश ने भी अपनी भैंसों और बहन-बेटियों की सुरक्षा को वोट का आधार बताया। भूपेंद्र सिंह और चंद्रशेखर ने कहा कि खाद मिल रही है और सब्सिडी सीधे खाते में आ रही है। चंद्रशेखर ने गांव में आवास और किसान सम्मान निधि जैसी योजनाओं के लाभ मिलने की बात कही। उन्होंने मुख्य सड़कों की स्थिति को बढ़िया बताया, हालांकि लिंक रोड टूटे हुए हैं।
मतदाताओं ने बताया इस बार किसको करेंगे वोट?
जसराना में मतदाताओं ने विकास, सुरक्षा, शिक्षा और बुनियादी ढांचे पर अपने विचार साझा किए। जितेंद्र ने जसराना में जाम और बाईपास के अधूरे काम पर चिंता जताई। जितेंद्र ने अस्पताल और पुस्तकालय में पुस्तकों की कमी का भी उल्लेख किया। नगिन अहमद ने जसराना में विकास की कमी और चारों सड़कों पर जाम की समस्या बताई। उन्होंने शिक्षा के लिए बड़े महाविद्यालय की अनुपलब्धता पर भी जोर दिया। रिजवान और आमिर कुरैशी ने भी बाईपास को एक बड़ा मुद्दा बताया। कई निवासियों ने जसराना में विकास की कमी को उजागर किया। शिक्षा और चिकित्सा सुविधाओं का अभाव भी एक बड़ी चिंता है। इसके विपरीत, प्रवीण गुप्ता और संजय कुमार ने वर्तमान सरकार के काम की सराहना की। उन्होंने साफ-सफाई और जाम न लगने को सकारात्मक बताया। संजय कुमार ने चोरी-चकारी खत्म होने, शांतिपूर्ण माहौल और मुफ्त राशन मिलने का जिक्र किया। आमिर कुरैशी ने विधायक सचिन के विकास कार्यों और गुंडागर्दी खत्म होने की प्रशंसा की। उन्होंने बहन-बेटियों की सुरक्षा और समय पर राशन मिलने को भी महत्वपूर्ण बताया।
जसराना के युवाओं का सबसे बड़ा सवाल क्या है?
'सत्ता का संग्राम' कार्यक्रम के तहत जसराना विधानसभा क्षेत्र के लोगों से बात की। युवाओं ने आगामी चुनाव के लिए अपने प्रमुख मुद्दों और अपेक्षाओं को साझा किया। एक निजी अध्यापक मुकेश कुमा ने बेरोजगारी को सबसे बड़ा मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि पढ़े-लिखे युवाओं को नौकरी के लिए बाहर जाना पड़ता है। उन्होंने वित्त विहीन शिक्षकों के लिए सरकारी मदद और मानदेय की मांग की। एक पहली बार मतदान करने वाली मोनिका ने अच्छी शिक्षा और नौकरी में पारदर्शिता पर जोर दिया। लता ने विधायक सचिन यादव के काम की सराहना की, जिन्होंने उनके गांव में सड़कें बनवाई हैं। लोगों ने 2022 के रोजगार के वादे को अधूरा बताया। आउटसोर्सिंग निगम और कई भर्ती प्रक्रियाएं हाई कोर्ट के हस्तक्षेप से रुक गईं। सरकारी कॉलेजों में प्रशिक्षित शिक्षकों की भारी कमी है, जिसे आउटसोर्सिंग से भरने का प्रयास हाई कोर्ट ने रोक दिया। जसराना बाईपास का निर्माण भी एक बड़ा मुद्दा है।