फिरोजाबाद। हेपेटाइटिस जिले में खतरा बनता जा रहा है। स्थिति यह है कि दो माह में 100 से ज्यादा पॉजिटिव मिले हैं। इसमें 65 मरीज हेपेटाइटिस बी के हैं और 35 मरीज हेपेटाइटिस सी के हैं। पुरुषों के मुकाबले, महिलाएं हेपेटाइटिस का सबसे ज्यादा शिकार हो रही हैं। इसमें गर्भावस्था में सही टीके न लगाए जाना प्रमुख वजह है। मेडिकल कॉलेज में 15 जनवरी से अब तक हेपेटाइटिस के 100 मरीज का उपचार के लिए पंजीकरण किया जा चुका है। इनमें पुरुष, महिलाएं और युवा शामिल है। जबकि बीते दो साल में 1200 से ज्यादा मरीज हेपेटाइटिस के मिल चुके हैं।
नोडल अधिकारी डॉ. गौरव गुप्ता ने बताया कि हेपेटाइटिस बी और सी दोनों ही संक्रमित इंजेक्शन और खून के कारण होती है। इन मरीजों का खून भी किसी दूसरे व्यक्ति को नहीं दिया जा सकता है। लीवर में सूजन होने के कारण भी हेपेटाइटिस रोग होता है। हेपेटाइटिस के कई कारण हो सकते हैं। इस वायरल इन्फेक्शन के कारण जान को खतरा भी हो सकता है। उन्होंने बताया कि पहले हेपेटाइटिस के मरीजों को सप्ताह में दो दिन परामर्श दिया जाता था, लेकिन अब रोजाना ही मरीजों की जांच कर उन्हें दवा दी जाती है। इसमे मरीजों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है।
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इन बातों का रखें ध्यान
-ताजा फलों का जूस और खूब पानी पीएं।
-भोजन को चबा-चबाकर अच्छी तरह से खाएं।
-एक साथ पेट भरकर भोजन कतई न करें।
-मैदा से बना खाना और मीठी चीजों का सेवन न करें।
-दिन में 4-5 बार थोड़ा-थोड़ा भोजन ही करें।
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ये होते हैं लक्षण-पीलिया हो जाना, जी मिचलाना व उल्टी आना, पेट दर्द और लीवर में सूजन, यूरीन का रंग बदलना, बहुत अधिक थकान, अचानक से वजन कम हो जाना, भूख न लगना या कम लगना।