टूंडला। तीन दिनों से यमुना जलस्तर लगातार घट रहा है। शनिवार को भी जलस्तर तेजी से घटा, मगर हथिनी कुंड से फिर पानी छोड़े जाने से दिल्ली में फिर यमुना जलस्तर बढ़ने पर यहां भी खतरा बरकरार बना हुआ है। किसानों को अपनी फसलों को लेकर चिंता बनी हुई है। इधर, पिछले एक हफ्ते बाधित गांवों की बिजली की सप्लाई को चालू कर दिया गया।
करीब सप्ताह यमुना ने रोद्र रूप दिखाया जिससे तटवर्ती किसानों की सैकड़ों बीघा फसलें यमुना में समां गईं। बृहस्पतिवार से यमुना जलस्तर का घटना शुरू हुआ तो लगातार कम होता जा रहा है। शनिवार को भी करीब दो फीट यमुना जलस्तर गिरा। तेजी से कम हो रहे यमुना जल स्तर से ग्रामीण ही नहीं प्रशासन ने भी राहत की सांस ली है। किसान दोबारा फसलों की तैयारी में जुटे थे, किंतु एक बार फिर हथिनी कुंड से पानी छोडे़ जाने एवं दिल्ली में फिर बाढ़ के हालातों की खबरों ने तलहटी के किसानों की चिंता बढ़ा दी है।
दिल्ली में जलस्तर बढ़ रहा है किसान चिंतित है कि खेतों में भरा पानी निकलने के बाद वह दुबारा बुबाई की तैयारी कर रहे हैं, किन्तु पुनः जलस्तर बढ़ा तो वह कहीं के भी नहीं रहेंगेl किसानों को फसलों की चिंता सता रही है। वहीं बाढ़ का पानी उतरने पर गांव ग्वारई, नगला काले आदि में बंद की गई विद्युतापूर्ति शनिवार को पुन: चालू कर दी। इससे ग्रामीणों ने गर्मी में राहत महसूस की। साथ ही पेयजल व्यवस्था भी सुचारू हो गई।
बाढ़ से इन गांव के किसान हुए थे प्रभावित
टूंडला। यमुना में आई बाढ़ से फसलों को नुकसान पहुंचने वाले कई गांव हैं। इसके साथ ही सबसे अधिक प्रभावित होने वाले क्षेत्रों में तलहटी में बसे रुधऊ मुस्तकिल, नगला केसों,जटपुरा, रसूलाबाद, रामगढ़,कुतुकपुर साहब, नगला काले, नगला राजपति, ग्वारई, नियामत पुर, नगला नंदा, घुरुकूआ, नगला मूसटा, ठार डेका, नगला हरवन्स, ठार बर व गार्डन गांव आदि हैं।
45 बीघ खेत बटाई पर ली थी जिसमें 20 बीघा में बाजरा, 15 बीघा में मक्का व 10 बीघा में सब्जियाँ बोई थी। सभी बाढ़ से नष्ट हो गईं। अब सोच रहे कि कौन सी फ़सल बोई जाए। यमुना पुनः आती है तो बच्चों के लिए दो वक्त की रोटी भी नसीब नहीं होगी।
शंकरलाल- किसान रसूलाबाद
साहूकारों से कर्जा लेकर 20 बीघा सब्जियाँ, 15 बीघा बाजरा व 22 बीघा मक्का फसल बोई थी, किंतु यमुना में आई बाढ़ सबकुछ बहा ले गई। यदि दोबारा जलस्तर बढ़ा तो वे दोबारा फसल कैसे करेंगे और फसल नहीं हुई तो साहूकारों का कर्जा कैसे उतरेगा।
रमेशचन्द्र किसान रामगढ़