फिरोजाबाद। क्षेत्र में यमुना में घुलनशील हानिकारक बैक्टीरिया फीकल कॉलीफार्म के अलावा सीओडी और बीओडी की मात्रा मानक से नौ गुनी ज्यादा मिली है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट पानी स्तरीय नहीं होने की ओर इशारा कर रहे हैं।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और नगर निगम हर माह यमुना के जल की जांच राजकीय प्रयोगशाला से कराता है। अगस्त माह में कराई गई जांच के नतीजे यमुना नदी का पानी मैला होने की ओर इशारा कर रहे हैं। इसके अलावा यमुना नदी में प्रवाहित गंदे पानी के प्रवाह को रोकने और यमुना की तलहटी वाले गांव में स्वच्छता अभियान की दरकार है। कारण पीसीबी द्वारा कराई जांच में यमुना नदी के पानी में जहां बायोलॉजिकल ऑक्सीजन डिमांड(बीओडी) और केमिकल ऑक्सीजन डिमांड (सीओडी) की मात्रा मानक से नौ गुनी ज्यादा दर्शाई गई है। बेहद हानिकारक फीकल कॉलीफार्म (सीवर के पानी में उत्पन्न हानिकारक बैक्टीरिया) की मात्रा मानक से नौ सौ गुना ज्यादा मिली है। रसायन विज्ञानी और एमजी कॉलेज प्राचार्य पूनम प्रकाश ने बताया कि बरसात में तट पर जमा गंदगी बह कर यमुना में प्रवाहित हो जाती है। वहीं नमी वाले स्थानों पर असंख्य अति सूक्ष्म कीट और कीट जनित अपशिष्ट भी यमुना में घुलने की आशंका रहती है। यमुना में बीओडी-सीओडी की मात्रा बढ़ने का यह भी कारण होता है।
यमुना के पानी की जांच रिपोर्ट-
-बीओडी की मात्रा की मात्रा प्रति लीटर पानी में10.4 मिलीग्राम
- यमुना के पानी में घुलनशील सीओडी की मात्रा28मिलीग्राम
- नोट मानक के अनुसार यमुना नदी के पानी में घुलनशील प्रदूषक कार्बनिक व अकार्बनिक तत्वों की मात्रा सामान्य स्तर पर लगभग 3.62 होनी चाहिए।
दस दिन बंद रहा एसटीपी
बीते दिनों एसटीपी प्लांट सोफीपुर का संचालन कर रहीं संस्था मेसर्स त्रिवेणी इंजीनियरिंग ने नगर निगम और जल निगम द्वारा रखरखाव शुल्क का भुगतान नहीं किये जाने पर जल शोधन का काम बंद कर दिया। एसटीपी प्लांट पर सीवरेज पानी का शोधन नहीं करने से (1 से 10 सितंबर तक) शहर का गंदा पानी सीधे यमुना में गिरता रहा। यही कारण रहा कि यमुना के पानी की जांच रिपोर्ट में बेहद हानिकारक बैक्टीरिया(फीकल कॉलीफार्म) की मात्रा भी बढ़ गई। रिपोर्ट के मुताबिक यमुना के पानी में फीकल कॉलीफार्म की मात्रा प्रति लीटर पानी में 9400 मिलीग्राम पाई गई है। उल्लेखनीय है कि एक लीटर पानी में अधिकतम फीकल कॉलीफार्म की मात्रा 100 मिलीग्राम होनी चाहिए।
पिछले साल 32 ग्राम सभा में चला था सफाई अभियान
यमुना की तलहटी से गुजरने वाले 32 ग्राम सभा में पिछले वर्ष अभियान चलाकर यमुना की साफ सफाई कराई गई थी। इतना ही नहीं स्वयं सेवी संस्थाओं ने भी जागरुकता अभियान चलाया था। इस वर्ष शासन प्रशासन ने यमुना शुद्धिकरण को चलाई गई मुहिम की सुध नहीं ली। नतीजा साफ हैं कि तलहटी वाले गांवों से निकलने वाला गंदा पानी यमुना में समा रहा है।
यमुना नदी में घुलनशील प्रदूषणकारी कार्बनिक व अकार्बनिक तत्वों के अलावा फीकल कॉलीफार्म की जांच कराई गई है। जांच रिपोर्ट के आधार पर यमुना के पानी की स्वच्छता को लेकर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। - राजेंद्र प्रसाद, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड