फिरोजाबाद। टीटीजेड एरिया में स्थित यूपीसीडा के आस्थान में पर्यावरण संरक्षण को बनी एनजीटी की गाइडलाइन की अनदेखी हाे रही है। आस्थान में गड्ढा युक्त सड़कें और पटरी पर उड़ने वाली धूल हवा की गुणवत्ता को खराब कर रही है। वहीं आस्थान में उत्पन्न सूखे कचरे के निस्तारण के लिए भी समुचित प्रबंधों का अभाव हैं।टीटीजेड एरिया में स्थित यूपीसीडा के औद्योगिक आस्थान जलेसर रोड पर पर्यावरण संरक्षण के तहत बनी गाइडलाइन धरातल पर नहीं हैं। चंद दिन पूर्व लगभग 2.5 करोड़ की लागत से बनी सड़कों पर गड्ढे उभर रहे हैं। वहीं अधिकांश सड़कों की पटरी कच्ची हैं। यही कारण है कि आस्थान में आने वाले हल्के और भारी वाहनों के टायरों से चिपककर धूल के कण हवा में घुल रहे हैं। वहीं पर्यावरण संरक्षण को अपरिहार्य सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के पुख्ता प्रबंध नहीं होने के कारण ज्यादातर इकाइयों के बाहर कूड़ा-कचरा के ढेर लगे हैं।
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सूख रहे पर्यावरण संरक्षण के लिए रोपे गए पौधे
एनजीटी गाइड लाइन के अनुसार इंडस्ट्रीज एरिया में उपलब्धता के आधार पर उपयुक्त भूमि पर पौधरोपण जरूरी है। बीते जुलाई माह में इस आस्थान में लगभग 50,000 विभिन्न प्रजाति के पौधे रोपे गए। समूचे आस्थान में सार्वजनिक नलकूप नहीं होने के कारण रोपे गए पौधे सूख रहे हैं। हालांकि कुछ जगहों पर खुद कारखानेदार पानी आदि की व्यवस्था कर पौधों की सिंचाई करा रहे हैं।
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जलभराव की समस्या बड़ी मुसीबत
औद्योगिक आस्थान के एक ओर सिक्सलेन हाईवे और दूसरी ओर जिला कारागार एवं स्वायतशासी मेडीकल कॉलेज स्थापित है। सिक्सलेन हाईवे सहारे नाला बना है। इस कारण से आस्थान के बाहर जलभराव होता है। वहीं जलेसर मार्ग की साइड में स्थित मेडिकल कॉलेज एवं जिला कारागार से निकलने वाला गंदा पानी आस्थान के सहारे जमा होता है, जो कि दलदल बन चुका है।
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पानी के समुचित प्रबंध नहीं होने के कारण पेड़-पौधे नहीं लग पाते हैं। सड़कों पर उड़ रही धूल आस्थान में हुए विकास कार्यों की सच्चाई है। सड़कें अधूरी है। सड़क पटरी बनी नहीं।
इंजीनियर राजकुमार शर्मा, अध्यक्ष द इंडस्ट्रीज ऑनर्स एसोसिएशन
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औद्योगिक आस्थानों में पर्यावरण संरक्षण नियमावली का अनुपालन जरूरी है। यूपीसीडा के आस्थान में धूल उड़ने, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के प्रबंध और गंदे पानी के भराव की जांच कराएंगे। जांच के बाद ही नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
दिनेश चंद पांडे, क्षेत्रीय अधिकारी पीसीबी