कांच उद्योग को राहत के तौर पर मिलीं कई सौगात
- आयकर छूट का दायरा बढ़ाने, स्टार्टअप और एमएसएमई इकाइयों को मिलने वाली वाली छूट को सराहा
- पेट्रोलियम पदार्थों को जीएसटी के दायरे में नहीं लाने और बैैंक ऋण पर लगने वाली ब्याज में छूट की घोषणा नहीं होने से मायूसी
संवाद न्यूज एजेंसी
फिरोजाबाद। मोदी सरकार के दसवें बजट पर कांच उद्योग क्षेत्र ने मिलीजुली प्रतिक्रिया दी है। आयकर छूट की सीमा बढ़ाने, एमएसएमई उद्योग को मशीनरी क्रय में छूट देने एवं स्टार्टअप योजना के तहत युवाओं को रोजगार की मुख्य धारा से जोड़ने के प्रयासों पर केंद्र सरकार को उद्योग जगत की सराहना मिली है। एक्सपोर्ट पैकिंग क्रेडिट लिमिट पर लगने वाली ब्याज दर में छूट नहीं मिलने, पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी के दायरे में नहीं लाने पर उद्यमियों में मायूसी भी दिखी।
आम बजट में आयकर छूट पांच से सात लाख किए जाने पर फिरोजाबाद के उद्योग जगत ने केंद्र सरकार की सराहना की है। उद्यमियों का दावा है कि इससे आयकर दाताओं की संख्या में इजाफा तो होगा ही। सूक्ष्म और लघु स्तर के उद्योग जगत को खासा लाभ होगा। बजट में सात लाख से ज्यादा की आय वाले करदाताओं और एमएसएमई उद्यमियों पर लगने टैक्स की दरें भी घटाईं गईं हैं। स्टार्टअप योजना के जरिए युवाओं को स्वरोजगार की मुख्यधारा से जोड़ने की गईं घोषणाओं पर भी कारोबारी व उद्योग जगत ने प्रसन्नता जाहिर की। फिरोजाबाद के कांच,चूडी और अन्य श्रेेणी के उद्यमियों ने एमएसएमई श्रेणी की इकाई स्थापना के लिये जरूरी मशीन क्रय करने पर लगने वाले टैक्स में की गई कमी को राहत देने वाला कदम बताया। नेचुरल गैस को जीएसटी के दायरे में नहीं लाने से उद्यमी निराश है। वहीं ओडीओपी योजना के लिए स्पष्ट घोषणा नहीं होने, कांच व अन्य श्रेणी के निर्यातकों को निर्यात पर मिलने वाली एक्सपोर्ट पैकिंग क्रेडिट लिमिट पर लगने वाली 8 से 9 प्रतिशत की ब्याज में छूट नहीं देने की घोषणा से कांच निर्यातकों में मायूस भी है।
-
- सरकार ने एमएसएमई इकाइयों की स्थापना को लेकर जो घोषणाएं की हैं। वह सराहना योग्य है। वस्तुत: केंद्र सरकार का बजट चुनावी बजट सरीखा है। इससे उद्योग जगत को बढावा मिलेगा।
राजकुमार मित्तल अध्यक्ष यूपीजीएमएस
- केंद्र सरकार द्वारा आयकर सीमा बढ़ाने की घोषणा का हम स्वागत करते हैं। इससे आयकर दाताओं की संख्या में इजाफा होगा। खास तौर पर सात लाख से ऊपर की आय होने पर लगने वाले टैक्स स्लैब में जो बदलाव किए हैं। उससे उद्योग जगत व मध्यम श्रेणी के कर दाताओं को राहत मिलेगी।
राजीव अग्रवाल, उद्यमी
- एमएसएमई इकाई स्थापना के लिए मशीन क्रय अथवा अन्य साजो सामान पर लगने वाले टैक्स में कमी की घोषणा सरकार का दूरगामी निर्णय है। इससे स्टार्टअप व ओडीओपी सेक्टर को लाभ होगा।
हेमंत अग्रवाल बल्लू, अध्यक्ष लघु उद्योग भारती
- निर्यात उद्योग की तरक्की के लिए एक्सपोर्ट पैकिंग क्रेडिट लिमिट (बैंक ऋण) पर लगने वाले ब्याज दरों आठ व नौ प्रतिशत को घटा कर पांच प्रतिशत किया जाना चाहिए था। इसके अलावा पेट्रोलियम पदार्थों को जीएसटी के दायरे में नहीं लाया गया। इससे कुछ मायूसी भी है।
मुकेश बंसल टोनी, अध्यक्ष द एक्सपोर्ट एसोसिएशन