फिरोजाबाद। गायों में बढ़ रहा लंपी वायरस अब आम लोगों की चिंता भी बढ़ाने लगा है। गाय के दूध का प्रयोग सर्वाधिक नवजातों के पिलाने में होता है। लंपी के डर से अभिभावक अपने बच्चों को गाय के दूध की जगह पैकिंग में बिकने वाले दूध पाउडर को पिला रहे हैं। एक माह में पाउडर दूध की डिमांड भी काफी बढ़ गई है। चिकित्सकों के अनुसार गाय के दूध का उबाल कर ही सेवन करें।
जिले के पशु पालन विभाग के आंकड़ों में 1300 से ज्यादा पशु लंपी का शिकार हैं। 12 गायों की मौत हो चुकी हैं। इसके अलावा सैकड़ों पशु ऐसे हैं, जिन तक पशु पालन विभाग की निगाह नहीं पहुंच सकी है। अनुमानित आंकड़ों के मुताबिक, जिले में एक लाख 30 हजार लीटर गाय के दूध का उत्पादन होता है। जिला पशु चिकित्साधिकारी डॉ. जितेंद्र कुमार ने बताया कि बीमार गायों के कारण अब दूध का उत्पादन घटकर 80 हजार लीटर के करीब हो गया है।
आसपास जनपद के मुकाबले फिरोजाबाद जिले में लंपी का प्रकोप ज्यादा है। लंपी के डर से लोग यहां दूध या दूध से बने उत्पादों को लेने से परहेज करने रहे हैं। लोग दूधवाली चाय की जगह अब लोग काली चाय पीने लगे हैं। पशु पालन विभाग के मुताबिक दूध को तय मानकों पर उबालकर पीने से वायरस का असर ना के बराबर है। जिले में एक लाख 60 हजार गाय हैं। लंपी के कारण दूध का उत्पादन घट गया है।
वैसे तो बीमार गाय का दूध पीने से बचा जाए। दूध को उबालकर पिया जाए तो उसमें कोई कमीं नहीं रह जाती है। हालांकि लंपी के डर के कारण कई माता, पिता डिब्बा बंद पाउडर का दूध बच्चों को पिलाने की जानकारी लेने आ रहे हैं। लोगों के एक प्रकार से डर है।
डा. एलके गुप्ता, बाल रोग विशेषज्ञ मेडिकल कॉलेज
यह बरतें सावधानी
- दूध का सेवन 60 डिग्री सेल्सियस या इससे अधिक के तापमान पर उबाल कर करें
- बिना उबले दूध का सेवन करने से बचें
- दूध के फटने के बाद उसका उपयोग न करें
- अन्य जिलों से आने वाले दुधारू पशु के वैक्सीनेशन के बारे में जानकारी ले लें