टूंडला। जिस प्रकार सड़क, रेल और हवाई मार्ग में नक्शे और दिशा सूचक यंत्रों से हम यात्रा करते हैं। उसी प्रकार मोक्ष मार्ग में आगे बढ़ने के लिए पंचम काल में जिनवाणी नक्शे का काम करती है। गुरु दिशा सूचक यंत्र का काम करते हैं। यह बात नगर के श्री पारसनाथ जैन मंदिर में चल रहे चातुर्मास के दौरान आचार्य निर्भय सागर महाराज के शिष्य शिवदत्त सागर ने प्रवचन करते हुए कही।
उन्होंने कहा कि सद्गुरु हमेशा नाव के समान होते है, जो हमेशा हर जीव को तारने के लिए पैदा होते है। आदमी के परिणामों से, क्रिया से सब पता चल जाता है। अगर आपको अच्छे के लिए याद किया जाए तो समझो स्वर्ग में गए हो। और अगर पीछे आपके कर्मों की वजह से बुराई मिलती है तो आप नरक गए है। हेमदत्त सागर महाराज ने कहा कर्म भूमि हमें ऐसे ही जीवन बर्बाद करने के लिए नहीं मिली है।
अपना उद्धार करने के लिए मिली है। पेड़ फल भी देता है छाया भी देता है। बिना कुछ आप से लिए, हमें हर एक जीव से कुछ न कुछ सीखना चाहिए। अपने जीवन में उसे धारण करना चाहिए।
इस मौके पर कमेटी अध्यक्ष डॉ शैलेंद्र जैन, सचिन जैन, अनिल जैन राजू, कमलेश जैन, संदीप जैन, बॉबी जैन, संजय जैन, नीरज जैन, प्रिंस जैन, अनिल जैन, प्रदीप जैन, पारस जैन, निखिल जैन, शैलेश जैन, दिनेश जैन, गोपाल जैन का सहयोग रहा।