फिरोजाबाद। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता डीके दुबे ने कहा कि वर्तमान न्याय प्रणाली में लोगों को निर्णय तो मिलता है, लेकिन न्याय नहीं मिलता है। जबकि गरीब न्याय पाने के लिए न्यायालय का दरवाजा खटखटाता है। यही कारण है न्यायालय में लंबित मुकदमे खत्म नहीं होते हैं। यदि सही मायने में गरीबों को न्याय देना है तो वर्तमान न्याय प्रणाली में भारतीय दर्शन का समावेश करना आवश्यक है।वह जनपद न्यायालय प्रांगण में अधिवक्ता परिषद के परिसंवाद कार्यक्रम संवैधानिक न्याय दर्शनम विषय पर आयोजित संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। मुख्य अतिथि जिला जज हरवीर सिंह ने कहा कि न्यायाधीश का पूरा प्रयास होता है कि जनता के साथ न्याय कर सके, लेकिन वह कार्य की अधिकता को देखते हुए न्याय देने में कठिनाई महसूस करता है। उन्होंने कहा कि मैं मानता हूं कि सही मायने में न्याय की जरूरत इस देश के गरीबों को है। देश का गरीब न्याय पाने के लिए अदालत की चौखट पर आता है और हमारा प्रयास होता है कि शीघ्र से शीघ्र गरीब को न्याय दिलाया जा सके।
राष्ट्रीय परिषद सदस्य विजय कुमार शर्मा ने कहा अधिवक्ता परिषद का उद्देश्य अंतिम पायदान पर खड़े गरीब तक न्याय को पहुंचाना है। परिषद बीते 32 वर्षों से यह काम कर रही है। युवा अधिवक्ताओं में जोश और जुनून बना रहे इसी लिए परिषद ऐसा आयोजन करती है। संगोष्ठी को अपर जिला जज यजुवेंद्र विक्रम सिंह, अवधेश पांडेय, अध्यक्ष मोटर दुर्घटना दावा अधिग्रहण धर्मेंद्र कुमार पांडेय, बार एसोसिएशन अध्यक्ष जेपी यादव, महासचिव योगेंद्र कुमार बघेल, अनूपचंद्र जैन एवं जेपी शर्मा ने विचार व्यक्त किए। अध्यक्षता परिषद जिलाध्यक्ष रवींद्र शर्मा तथा संचालन महासचिव दलवीर सिह तोमर एडवोकेट ने किया। इस दौरान डंबर सिंह कुशवाह, अजमोद सिंह चौहान, भूपेंद्र सिंह राठौर, मनोज शर्मा, शीलेंद्र प्रताप चौहान, राजीव उपाध्याय, भूवनेश्वर सिंह, ब्रजेश सिंह, दिनेश भारद्वाज, राजेश कुलश्रेष्ठ, रीतेश शर्मा, प्रेम निवास एवं विपिन कुमार शामिल थे।