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सॉफ्टवेयर की मदद से होगी परदेसी बाबुओं की निगरानी

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फिरोजाबाद। जिले में कोरोना के नौ पॉजिटिव केस मिलने के बाद स्वास्य विभाग ने अपनी कार्रवाई तेज दी है। लॉकडाउन में बाहर से आने वाले लोगों से संक्रमण के खतरे को देखते हुए इनकी निगरानी के लिए सॉफ्टवेयर माइग्रेशन ट्रेकिंग सिस्टम की मदद ली जा रही है। इसमें डाटाअपडेट किया जाएगा। ब्लाक स्तर से शासन स्तर तक ट्रेकिंग की जा सकेगी कि कौन व्यक्ति किस तिथि को कहां से आया है। इस साफ्टवेयर को सरकार ने यूनिसेफ के सहयोग से विकसित किया है। आशा कार्यकर्ता अपने-अपने क्षेत्र से बाहर से आए लोगों की जानकारी जुटा रही है। इसे ब्लाक स्तर पर साफ्टवेयर में फीड किया जाएगा। इसके बाद माइग्रेशन ट्रेकिंग सिस्टम से हर गांव के एक-एक प्रवासी व्यक्ति की जानकारी साफ्टवेयर में एक क्लिक पर उपलब्ध हो सकेगी। सभी ब्लाकों के बीपीएम (ब्लॉक कम्यूनिटी प्रोसेस मैनेजर) को लखनऊ से वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से ट्रेनिंग दी जा चुकी है। सीएमओ डा. एसके दीक्षित ने कहा कि माइग्रेशन ट्रेकिंग सिस्टम को चालू करा दिया है। इससे प्रवासी लोगों को बाद में भी ट्रेक किया जा सकेगा। ये जानकारियां होगीं दर्ज विदेश यात्रा और अन्य राज्यों से आए सभी प्रवासी लोगों की जानकारी एप पर फीड होगी। प्रत्येक व्यक्ति में दिखे कोरोना वायरस के लक्षण (बुखार, सूखी खांसी, सांस लेने में दिक्कत), होम क्वारंटीन और रेफर किए लोगों की जानकारी भी साफ्टवेयर पर अंकित की जाएगी। डाटा फीड करने के बाद अलग-अलग तरीके से स्थिति का जायजा लेने में मदद मिलेगी। आशाओं को मिलेगी अतिरिक्त प्रतिपूर्ति राशि प्रमुख सचिव स्वास्थ्य के आदेश पर आशा कार्यकत्री अपने क्षेत्र के सभी घरों का भ्रमण करेंगी। ऐसे घरों को चिन्हित कर रिपोर्ट देंगी। ऐसे लोगों की भी पहचान की जा रही है। जो किसी कोरोना संक्रमित के संपर्क में आए हों। कोरोना के संदिग्ध मामलों की पहचान कर रेफर करने को भी कहा गया है। वे होम क्वारंटीन किए गए लोगों का फालोअप भी करेंगी। इस काम के लिए आशा कार्यकर्ताओं को अप्रैल और मई में एक-एक हजार रुपये अतिरिक्त धनराशि दी जाएगी।
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