फिरोजाबाद। श्री छदामीलाल जैन मंदिर में चल रहे चंद्र प्रभु भगवान के पंच कल्याणक महोत्सव में रविवार को अंतिम दिन भगवान के मोक्ष का मार्ग दर्शाया गया। इस अवसर पर शास्त्री सतीश जैन के मंत्रोच्चारण के साथ सुबह जिनेंद्र भगवान की शांतिधारा तथा चंद्रप्रभु विधान किया।
मंदिर प्रांगण की आयोजित धर्मसभा में आचार्य सौभाग्य सागर, आचार्य आदित्य सागर, आचार्य सुरत्न सागर ने बताया कि जैन धर्म में मोक्ष का अर्थ है पुदगल कर्मों से मुक्ति। मोक्ष प्राप्त करने के बाद जीव (आत्मा) जन्म मरण के चक्र से निकल जाता है और लोक के अग्रभाग सिद्धशिला में विराजमान हो जाता है। सभी कर्मों का नाश करने के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती हैं। मोक्ष के उपरांत आत्मा अपने शुद्ध स्वरूप में आ जाती है। ऐसी आत्मा को सिद्ध कहते है।
चंद्रप्रभु भगवान की प्रतिमा को इंद्रों ने हाथी के रथ पर बैंडबाजों के आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर जैन नगर खेड़ा में नवनिर्मित वेदी पर विराजमान किया गया। रथयात्रा वापसी में मंदिर कमेटी के अध्यक्ष सुभाष चंद्र जैन, डॉ. कमल कुमार जैन, मुकेश जैन, अंशुल जैन, नीरज जैन, अनूप जैन, राजेश जैन, संजय जैन, मनोज जैन, अनुज जैन, बॉबी जैन उपस्थित रहे।