फिरोजाबाद। गर्भवती महिलाओं के लिए सुरक्षित प्रसव के लिए तरह-तरह की योजनाएं चल रही हैं। लेकिन, सरकार कई सालों बाद भी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर अल्ट्रासाउंड की व्यवस्था नहीं कर सकी। जनपद की नौ सीएचसी में आठ पर अल्ट्रासाउंड जांच की व्यवस्था नहीं है। इससे गर्भवती महिलाओं को मजबूर होकर निजी सेंटर में अल्ट्रासाउंड कराना पड़ता है या फिर मेडिकल कॉलेज के चक्कर लगाने पड़ते हैं। भागदौड़ के कारण कई गर्भवतियों की हालत बिगड़ जाती है। जिले में नौ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तथा 52 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की बात तो दूर जिले के आठ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर अल्ट्रासाउंड जांच कराने की कोई व्यवस्था नहीं है। इससे गर्भवती महिलाओं सहित अन्य मरीजों को प्राइवेट पैथाेलॉजी में अल्ट्रासाउंड कराने के लिए जाना पड़ रहा है। महिला चिकित्सक या एएनएम जांच कराने के लिए अल्ट्रासाउंड कराने का परामर्श देकर बाहर भेज देती हैं। ऐसे में उनके परिजन प्रसूता या अन्य मरीजों को लेकर इधर-उधर भटक कर समय व धन दोनों बर्वाद करना पड़ता है।-
फ्री जांच के लिए तय करनी पड़ती है लंबी दूरी
प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना के तहत गर्भवती महिलाओं को ई बाउचर मिलता है। इसके बाद किसी भी निजी केंद्र पर मुफ्त अल्ट्रासाउंड की जांच का लाभ इन्हें दिया जाता है। सीएचसी पर अल्ट्रासाउंड मशीन न होने के चलते इन्हें लंबी दूरी तय कर जिला मुख्यालय जाना पड़ता है। इसके बाद इन्हें लाभ मिलता है। ऐसे में समय के साथ पैसे भी खर्च करना पड़ता है।
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मेडिकल कॉलेज में बढ़ रहा दबाव
सीएचसी पर जांच की व्यवस्था न होने से ग्रामीण क्षेत्र के मरीज सीधे जिला मुख्यालय का रुख करते हैं। इस वजह से मेडिकल कॉलेज में मरीजों की भीड़ ज्यादा इकट्ठा हो जाती है। यदि सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर जांच व इलाज की सभी सुविधाएं मिलने लगे तो मेडिकल कॉलेज में दबाव थोड़ा कम होगा।
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जिले के टूंडला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, मेडिकल कॉलेज और संयुक्त अस्पताल शिकोहाबाद में मरीज को अल्ट्रासाउंड की सुविधा मिल रही है। शासन को इसके लिए प्रस्ताव भेजा जाएगा, जिससे देहात क्षेत्रों में अल्ट्रासाउंड की सुविधा शुरू हो सके।
डाॅ. बीडी अग्रवाल, नोडल अधिकारी पीसीपीएनडीटी