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Firozabad News: संभलकर खाएं रंगीन कचरी-पापड़ और मावा, बीते साल 70 फीसदी नमूने हुए फेल

Wed, 20 Mar 2024 12:14 AM IST
आगरा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
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फिरोजाबाद। होली को लेकर बाजार इन दिनों चिप्स-पापड़ और कचरी आदि उत्पादों से अटे पड़े हैं। रंग-बिरंगे कचरी-पापड़ भी बिक रहे हैं, लेकिन ये रंग-बिरंगे खाद्य उत्पाद बीमारियों के सौदा से कम नहीं है। बीते साल होली पर चले अभियान में मावा, रंगीन कचरी-पापड़ और पनीर सहित अन्य खाद्य पदार्थों के 56 नमूने लिए थे। इसमें 39 नमूने जांच में फेल आए। रंगीन कचरी और मावा के 12 नमूने असुरक्षित पाए गए। इन्हें अखाद्य रंग और अखाद्य पदार्थों से तैयार किया गया था। 24 मार्च को होली है, ऐसे में होली के रंगों की तरह रंग-बिरंगे पापड़ और कचरी किसी को भी आकर्षित करने के लिए काफी हैं। इस साल की होली के समय बाजार में चायनीज पापड़ और कचरी की खूब बिक्री हो रही हैं। इसमें क्या-क्या मिलाया गया है, इसकी जानकारी किसी को नहीं है। चटकीले रंगों से बनी ये कचरी लोगों को खूब भा रही है। लेकिन, बीते साल लिए गए नमूनों की रिपोर्ट लोगों को संकेत दे रही है कि जांच परख कर ही खाद्य पदार्थों की बिक्री करें। मंगलवार को मावा मंडी के लोगों के साथ सहायक आयुक्त ने बैठक कर शुद्ध मावा बेचने की बात कही।
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अब घरों में कम ही बनते हैं कचरी-पापड़

होली पर गुझिया के साथ ही आलू के चिप्स, पापड़, कचरी बनाने की भी परंपरा है, लेकिन भागदौड़ भरी जिंदगी में लोगों के पास इसके लिए समय नहीं है। ऐसे में ज्यादातर लोग बाजार से खरीदकर लाते हैं। बाजार में इनकी मांग बढ़ने का फायदा मिलावटखोर उठा रहे हैं।



मिलावटी रंगों को खाने से ये हो सकती है परेशानी

-गैस और एसिड बनने के साथ पेट संबंधी अन्य बीमारी।
-मिलावटी सामग्री के प्रयोग से पथरी की आशंका रहती है

-रंग के शरीर में जाकर रक्त में घुलने से त्वचा संबंधी रोग की आशंका रहती है

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रेडीमेड गुझिया और नमकीन भी बाजार में

बाजार में रेडीमेड गुझिया और नमकीन भी जमकर बिक रही है। वैसे तो गुझिया घरों में ही बनाए जाने का रिवाज है, लेकिन कई लोग समय कम होने के कारण बाजार से भी इस समय खरीदते हैं। ऐसे में दुकानों पर इनकी बिक्री हो रही है। वहीं गुझिया 230 से पांच सौ रुपये प्रति किलो तक बाजार में बिक रही है। बीते साल गुजिया में प्रयोग होने वाला मावा भी असुरक्षित निकला था।
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-रंगीन खाद्य पदार्थों को बिल्कुल न खरीदें, बीते साल मिलावटखारों को सक्रिय देखकर इस बार अभियान शुरू कर दिया है। यदि कहीं मिलावटी खाद्य पदार्थों के बनाने की जानकारी लगे तो हमें अवगत कराएं। हम कार्रवाई करेंगे। मावा विक्रेताओं के साथ भी बैठक कर रहे हैं।
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डाॅ. सुधीर कुमार, सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा एवं औषधि विभाग
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