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निगरानी समिति की ड्यूटी,बैठकों में बीत जाता है समय

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किशनपुरा अरमराजट्ट आंगनवाड़ी केंद्र पर बच्चों को पढ़ाती हुई - फोटो : FIROZABAD
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फिरोजाबाद। आंगनबाड़ी केंद्रों पर तैनात कार्यकर्ता को कभी गांव में निगरानी समिति का काम संभालने तो कभी मीटिंग में भेज दिए जाने के कारण केंद्रों पर इनकी उपस्थिति कम ही रह पाती है। आखिर इस हाल में आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन सही ढंग से नहीं होता है। सहायिका बच्चों को पढ़ाना तो दूर बल्कि उनकी देखभाल तक नहीं कर पाती है। इस हाल में इन केंद्रों पर कैसे प्री प्राइमरी जैसी पढ़ाई हो सकेगी। जिले के कई केंद्रों पर इसी तरह की स्थिति देखने को मिली।
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फिरोजाबाद ग्रामीण के नगला श्रोती स्थित प्राथमिक स्कूल प्रांगण में संचालित आंगनबाड़ी केंद्र पर सहायिका सूरजमुखी बच्चों को संभाल रहीं थी। लंच हो जाने के कारण छह बच्चे भोजन करते मिले। सूरजमुखी का कहना था कि कार्यकर्ता तो मीटिंग में शामिल होने के लिए गई है। हम बच्चों को संभाल रहे है। रसीदपुर कनेंटा में संचालित केंद्रों पर कार्यकर्ता पंचायतघर में चल रही डेंगू के सत्यापन के लिए चल रही बैठक में मौजूद थी। सप्ताह में दो दिन सोमवार एवं बृहस्पतिवार को आंगनबाड़ी केंद्र खोलने के आदेश हैं उसमें भी मीटिंग में जाने के कारण पढ़ाई नहीं हो पाती है।
समय से नहीं मिल रहा पुष्टाहार
मक्खनपुर के गांव किशनपुर अरमरा जट्ट में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता प्रेमलता मौजूद थी। यहां 41 बच्चे तीन से छह वर्ष वाले पंजीकृत हैं। लेकिन 14 मौजूद मिले थे। इनको बांटे जाने वाला पुष्टाहार अक्तूबर माह का अभी तक नहीं आया है। किरथरा में कार्यकर्ता प्रतिभा सिंह मौजूद मिली। 46 बच्चों में 25 की उपस्थिति थी। जबकि गर्भवती आठ एवं धात्री महिलाएं 13 पंजीकृत हैं। यहां पुष्टाहार का वितरण मानक के अनुरूप नहीं किया जा रहा है। सिर्फ चना की दाल बांटी जा रही है। इंदुमई में कार्यकर्ता कमलेश कुमारी मौजूद मिली। 30 पंजीयन बच्चों में दस मौजूद मिले। धात्री 25 एवं गर्भवती महिलाएं 15 पंजीकृत हैं। महिलाओं को सिर्फ दाल का वितरण किया जा रहा है।
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