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रमज़ान उल मुबारक का आखिरी अशरा यानी आखिरी दस दिन

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फिरोजाबाद। मदरसा हबीबिया डायरेक्टर मोहम्मद अरशद खान रज़वी ने कहा कि रमज़ान उल मुबारक का महीना बड़ी अजमतों बरकत वाला है। अल्लाह पाक इस माह में इबादत का सवाब सत्तर गुना बड़ा देता है। रमज़ान की बरकत के क्या केहने। तीस दिनों के रमज़ान को तीन हिस्सों में बांटा गया है। रमज़ान में तीन अशरे होते हैं। पहला अशरा रहमत, अल्लाह पाक अपने बन्दों पर रहमत नाजिल फरमाता है। दूसरा अशरा बरकत,जिसमें अल्लाह पाक अपने बन्दों के रिज़क में बे पनाह बरकत अता कर देता है और आखिर के दस दिन यानी तीसरा अशरा मगफिरत,का जिसमें रब अपने बन्दों को जहन्नुम से आजादी देता है और इसी आखिरी दस दिनों में लेलतुलकद्र यानी पाच ताक रातें भी आती हैं जिस की रातों मैं जागकर बन्दे अपने रब की इबादत करते हैं और अपने रब को राजी करते हैं और अल्लाह पाक उनकी मगफिरत करदेता। इसी आखिरी अशरे मैं मस्जिदों में दस दिन का एतेकाफ भी किया जाता हैं जिसकी हदीसों में बहुत फजीहत आई है। इसी आखिरी अशरे में आखिरी जुमा, जिसको अलविदा जुमा कहा जाता है।इस जुमें को और जुमों के मुकाबले मुसलमान ज्यादा एहमियत देते हैं, मस्जिदों में जाकर नमाज़ अदा करते हैं। मगर लोकडाउन की वजह से मस्जिदों आम लोगों को नमाज़ अदा करने की इजाज़त नही है। इस लिये हम हुकूमत से गुजारिश करते हैं कि अलविदा जुमा और ईद के लिए मस्जिदों को खोल दिया जाए जिससे यह नमाज़ मस्जिदों में अदा करली जाए। अगर हुकूमत हमें इजाज़त देती है, तो मस्जिदों में वर्ना अपने घरों में ही नमाज अदा करें। इसमें सदका फित्र भी अदा करते हैं, इसको ईद से पहले ही पेहले अदा करना चाहिए । सदका फित्र और जकात ये भी इबादत है मगर ये माली इबादत है जिसको अल्लाह पाक ने मालो दौलत अता किया वो अपने मालो दौलत से अपने गरीब भाइयों और पडोसियों की मदद करे जिससे वो भी रमज़ान और ईद की खुशियां अपनी फेमली के साथ मना सके।
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